चेन्नई , जुलाई 28 -- तमिलनाडु में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच चल रहे टकराव के बीच मंगलवार को उस समय एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 'तमिल थाई वाझ्थु' (राज्य गीत) को वंदे मातरम् और राष्ट्रीय गान के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया। इसके विरोध में राज्य के शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन और तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के स्थानीय विधायकों ने समारोह का बहिष्कार किया।
तिरुनेलवेली स्थित विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल वी.आर. अरलेकर भी शामिल हुए। तमिलनाडु में परंपरा के अनुसार सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत 'तमिल थाई वाझ्थु' से होती है। पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार ने इसे आधिकारिक राज्य गीत का दर्जा भी दिया था।
शिक्षा मंत्री विश्वनाथन ने सोशल मीडिया पर कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति की सर्वोच्चता तथा उसके सम्मान की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने समारोह का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार तमिल के सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आधिकारिक कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाझ्थु' को उसका उचित स्थान और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री विजय इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि 'तमिल थाई वाझ्थु' के रचयिता प्रसिद्ध तमिल विद्वान सुंदरम पिल्लै थे, जिनके नाम पर इस विश्वविद्यालय का नाम रखा गया है। ऐसे में राज्यपाल के निर्देश पर विश्वविद्यालय द्वारा राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखने के निर्णय ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों और राज्य सरकार के सहयोगी दलों ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे तमिल भाषा और संस्कृति का अपमान बताया है।
पिछले सप्ताह विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एन. चंद्रशेखर ने कहा था कि दीक्षांत समारोह की रूपरेखा को लेकर उनके पास राज्यपाल के निर्देशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उस समय भी इस निर्णय की आलोचना हुई थी।
यह पहला अवसर नहीं है जब राज्यपाल द्वारा वंदे मातरम् और राष्ट्रीय गान को 'तमिल थाई वाझ्थु' से पहले रखे जाने पर विवाद पैदा हुआ हो। गत 10 मई को मुख्यमंत्री विजय और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में भी राज्य गीत तीसरे स्थान पर रखा गया था। नयी विधानसभा के पहले सत्र के दौरान राज्यपाल ने परंपरा के अनुसार सत्र की शुरुआत में 'तमिल थाई वाझ्थु' बजाये जाने पर कोई आपत्ति नहीं जतायी थी।
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