चेन्नई , सितंबर 08 -- तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र सरकार से 2027 की जनगणना के आगामी दूसरे चरण के लिए अस्पष्ट "ओपन-कॉलम मेथड" को हटाने का आग्रह किया गया है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इन समुदायों का डेटा सही ढंग से दर्ज करने के लिए पिछड़े वर्गों (बीसी), अत्यंत पिछड़े वर्गों (एमबीसी) और विमुक्त समुदायों (डीएनसी) की राज्य और केंद्र की आधिकारिक सूचियों को सीधे जनगणना पोर्टल/एप्लीकेशन में पहले से लोड किया जाये। इसमें यह भी अनुरोध किया गया कि नागरिकों को अपनी जाति या समुदाय चुनने के लिए एक स्टैंडर्ड ड्रॉप-डाउन मेनू या सूची दी जाये।
बजट सत्र के आखिरी दिन पिछड़े वर्ग कल्याण मंत्री वी. संपतकुमार की ओर से पेश किये गये प्रस्ताव में कहा गया कि बीसी, एमबीसी , ओबीसी और डीएनसी की गिनती उसी मानक तरीके से की जानी चाहिए, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए किया जाता रहा है, और इसके लिए सत्यापित आधिकारिक सूचियों का उपयोग किया जाये।
उन्होंने कहा, "यह देखते हुए कि आज़ादी के बाद हुई जनगणना में 'अन्य पिछड़ा वर्ग' (ओबीसी) की जाति-वार जानकारी इकट्ठा नहीं की गयी है, इसलिए संविधान के अनुसार राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा अधिसूचित 'पिछड़ा वर्ग', 'अति पिछड़ा वर्ग' और 'विमुक्त समुदायों' (डिनोटिफाइड कम्युनिटी) की सूचियों के आधार पर सही जानकारी हासिल करना ज़रूरी है।"प्रस्ताव में कहा गया, "समाज के सभी वर्गों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के मकसद से, यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से आग्रह करती है कि वह भारत की 2027 की जनगणना के दूसरे चरण के दौरान बीसी ,एमबीसी और डीएनसी की जाति-वार जानकारी उसी तरह इकट्ठा करे जैसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए किया जाता है।साथ ही, राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा अधिसूचित बीसी ,एमबीसी और डीएनसी की जानकारी को जनगणना गणना पोर्टल/एप्लिकेशन में पहले से ही लोड कर दिया जाए ताकि केवल उन सूचियों में मौजूद नामों के आधार पर जानकारी इकट्ठा की जा सके, और 'पिछड़ा वर्ग', 'अति पिछड़ा वर्ग' तथा 'विमुक्त समुदायों' की गिनती के लिए अस्पष्ट 'ओपन-कॉलम मेथड' को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाये।"अन्नाद्रमुक , कांग्रेस, वीसीके , वामपंथी पार्टियों और पीएमके समेत कई पार्टियों के सदस्यों के इस पर बोलने के बाद, प्रस्ताव को 'वॉयस वोट' (मौखिक मतदान) के लिए रखा गया। इसके बाद स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने घोषणा की कि इसे सर्वसम्मति से मंज़ूर कर लिया गया है , हालांकि जब यह प्रस्ताव पेश किया गया तो मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। उन्हें दिन में पहले ही सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और हंगामा करने के कारण सामूहिक रूप से सदन से बाहर निकाल दिया गया था।
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