चेन्नई , मई 10 -- तमिलनाडु की राजनीति में कदम रख रहे नये मुख्यमंत्री विजय ने अपनी नई पारी की शुरुआत के साथ ही अपनी वेशभूषा से एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अक्सर सार्वजनिक मंचों पर तमिल नेताओं को पारंपरिक सफेद धोती और शर्ट में देखा जाता है लेकिन श्री विजय ने अपने शपथ ग्रहण जैसे सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में आधुनिक 'कोट-पैंट' को प्राथमिकता दी है।

विशेष रूप से उनके काले रंग के कोट को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

भारतीय परंपरा में आमतौर पर काले रंग को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसे में श्री विजय का पारंपरिक तमिल पोशाक के बजाय 'ब्लैक सूट' में नजर आना उनकी एक 'आधुनिक और बदलाववादी' छवि पेश करने की कोशिश मानी जा रही है। जहाँ उनके समर्थक इसे एक नए युग की राजनीति का संकेत मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे तमिल संस्कृति और परंपराओं से दूरी के रूप में देख रहे हैं।

तमिलनाडु में पुरुषों की पारंपरिक और सबसे सम्मानित पोशाक 'वेष्टी' है। यह सफेद रंग का एक लंबा सूती या रेशमी कपड़ा होता है, जिसे कमर के चारों ओर लपेटा जाता है। इसे केरल में मुंडू और उत्तर भारत में धोती के समान माना जाता है, लेकिन इसे पहनने का तरीका और इसकी सांस्कृतिक महत्ता अलग है। वेष्टी के साथ अक्सर कंधे पर एक सफेद गमछा या कपड़ा रखा जाता है जिसे 'अंगवस्त्रम' कहते हैं। यह सम्मान और शालीनता का प्रतीक माना जाता है।

इसे शुभ अवसरों, मंदिरों और राजनीतिक सभाओं में 'सफेद वेष्टी और शर्ट' पहनना तमिल अस्मिता और सादगी का परिचायक है।

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