चेन्नई , सितंबर 15 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन की ओर से दायर एक करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एवं द्रमुक नेता एमके स्टालिन और पार्टी की आईटी शाखा को अपना पक्ष रखने के लिए 21 सितंबर तक का समय दिया है।
मंत्री ने अपनी याचिका में मानहानिकारक पोस्ट हटाने, बिना शर्त माफी मांगने और एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
यह मुकदमा नशीले पदार्थों के एक मामले में गिरफ्तार आरोपी का करीबी रिश्तेदार बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दायर किया गया है। जब यह याचिका सुनवाई के लिए आयी तो न्यायमूर्ति के गोविंदराजन थिलाकावती ने श्री स्टालिन के अधिवक्ता के अनुरोध पर उन्हें समय दे दिया और मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर तय कर दी।
न्यायाधीश ने 28 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई के दौरान मंत्री के अधिवक्ता एपी सूर्यप्रकाशम की प्रारंभिक दलीलों को सुनने के बाद श्री स्टालिन को नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि 'एक्स' पर की गयी पोस्ट प्रथम दृष्टया झूठी और बेहद मानहानिकारक है।
श्री अर्जुन ने श्री स्टालिन की उस पोस्ट के बाद अदालत का रुख किया था, जिसमें दावा किया गया था कि 258 करोड़ रुपये के ड्रग्स तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बयान में मुख्य आरोपी बताये गये जॉन ब्रिटो मंत्री के रिश्तेदार हैं।अपनी याचिका में उन्होंने ब्रिटो के साथ किसी भी संबंध से इनकार किया और तर्क दिया कि इन पोस्टों ने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की और श्री स्टालिन तथा द्रमुक आईटी शाखा को उनके खिलाफ झूठी और मानहानिकारक सामग्री हटाने और भविष्य में ऐसी टिप्पणियां करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
मंत्री ने दलील दी कि आठ जून को द्रमुक आईटी शाखा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में उन्हें नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले से जोड़ा था। पोस्ट में पार्टी ने कहा था कि चेन्नई और रामनाथपुरम में 258 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्ती मामले का मुख्य साजिशकर्ता मंत्री का करीबी रिश्तेदार है।
उन्होंने यह भी कहा कि ये बयान पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत, विद्वेषपूर्ण और बेबुनियाद हैं, जिनका मकसद उनकी छवि को धूमिल करना है और उनका गिरफ्तार आरोपी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि द्रमुक अध्यक्ष होने के नाते श्री स्टालिन पार्टी और उसकी आईटी शाखा के कामकाज पर नियंत्रण, निगरानी और समग्र अधिकार रखते हैं, इसलिए वे इस मानहानिकारक पोस्ट के लिए जिम्मेदार हैं।
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