चेन्नई , मई 23 -- तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में 10 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ पॉस्को की धाराएं लगाई हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली इस बच्ची का शव सुलुर के पास कन्नमपलयम में एक तालाब में मिला। इस घटना की विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है। यह बच्ची गुरुवार शाम से लापता थी।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आश्वासन दिया है कि सरकार इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाएगी।

बच्ची के माता-पिता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पांच विशेष टीमें गठित कीं और अपनी तलाशी अभियान तेज़ कर दिया। दो सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण करने और तकनीकी सबूतों के आधार पर, पुलिस ने दो दोषियों को गिरफ्तार किया। इनमें मुख्य आरोपी कार्तिक भी शामिल है, जो बच्ची का पड़ोसी था और जिसने इस भयानक अपराध को अंजाम दिया था।

दूसरा आरोपी उसका करीबी दोस्त मोहनराज (30) है, जिस पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। कार्तिक ने अपराध से पहले और बाद में मोहनराज से फोन पर बात की थी, लेकिन मोहनराज ने इस बात की जानकारी पुलिस को नहीं दी थी।

कोयंबटूर रेंज वेस्ट ज़ोन की पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रम्या भारती ने शनिवार को बताया कि गुरुवार शाम जब बच्ची अपने घर के सामने खेल रही थी, तभी उसके पड़ोसी कार्तिक (33) (जो मूल रूप से नागपट्टिनम जिले का रहने वाला है) ने उसे बहला-फुसलाकर एक सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। बाद में उसने एक नारियल के बाग में बच्ची की हत्या कर दी और उसके शव को तालाब में फेंक दिया।

जब लड़की लापता हुई, तब उसके पिता काम पर बाहर गए हुए थे और उसकी माँ घर के अंदर थी। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो उसके परिवार वालों और गाँव वालों ने मिलकर उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार, रात करीब 8:30 बजे उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

वेस्ट ज़ोन के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) समिनाथन और कोयंबटूर ज़िले के पुलिस अधीक्षक पवन कुमार के साथ मौजूद सुश्री रम्या ने बताया कि गुरुवार रात करीब 8:30 बजे शिकायत मिलते ही, बिना किसी देरी के तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी। इसके बाद लड़की का पता लगाने के लिए पूरी रात बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। लंबी तलाशी और 200 से ज़्यादा सीसीटीवी फुटेज तथा तकनीकी सबूतों का विश्लेषण करने के बाद यह साफ़ हो गया कि लड़की को आखिरी बार उसके पड़ोसी कार्तिक के साथ देखा गया था, जो उसे एक दोपहिया वाहन पर अपने साथ ले गया था।

पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर ही कार्तिक को और बाद में उसके साथी मोहनराज को गिरफ्तार कर लिया। जब विशेष टीमों ने उस अपार्टमेंट को घेरा, जहाँ कार्तिक पहली मंज़िल पर छिपा हुआ था, तो पुलिस द्वारा घेरे जाने पर उसने पहली मंज़िल से कूदकर भागने की कोशिश की। इस कोशिश में उसके दाहिने हाथ और पैर टूट गये। उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और इलाज के लिए सरकारी कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि मोहनराज को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट भगवती अम्माल ने शनिवार शाम को उस अस्पताल का दौरा किया जहाँ कार्तिक का इलाज चल रहा था। उससे पूछताछ करने के बाद, उन्होंने उसे पांच जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इससे पहले, पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के दौरान, कार्तिक ने लड़की के साथ यौन उत्पीड़न करने और उसकी हत्या करने की बात कबूल कर ली थी। डॉक्टर के बयान के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए और साथ ही पॉस्को अधिनियम के प्रावधानों को भी लागू किया गया। हालाँकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारणों पर और ज़्यादा रोशनी पड़ेगी, लेकिन सुश्री रम्या ने कहा कि जिस तरह पुलिस ने तेज़ी और तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है, उसी तरह मामले की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी और पीड़िता को न्याय दिलाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को मुआवज़ा देने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जा चुके हैं।

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