चेन्नई , अक्टूबर 07 -- तमिलनाडु में करूर और कोयंबटूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दवाइयों के कवरों पर हिंदी शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगमम (टीवीके) और मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच भाषायी तकरार बढ़ गयी है।
दवाइयों के इन छपे हुए कवरों पर सुबह, अपराह्न , शाम और रात में दवा लेने की जानकारी क्रमशः तमिल, अंग्रेजी और हिंदी में दी गयी थी, ताकि मरीजों और प्रवासी श्रमिकों को डॉक्टरों के निर्देश के अनुसार दवा लेने का तरीका समझने में मदद मिल सके।
द्रमुक ने इसे हिंदी थोपने की कोशिश करार देते हुए सरकार की लंबे समय से चली आ रही दो-भाषा नीति पर सवाल उठाया।
द्रमुक नेता एवं पूर्व मंत्री टी.आर.बी. राजा ने दवाइयों के कवर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने इन दवा के कवर का वितरण बंद करने का निर्देश जारी किया। ये कवर दिसंबर 2025 में इरोड की एक सहकारी प्रेस में छापे गये थे।
डॉ. राजा ने अपने 'एक्स' पोस्ट में कहा, "ऐसा लगता है कि तमिलनाडु के अस्पतालों में भी तीन-भाषा नीति लागू की जा रही है।" उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की तस्वीरें भी साझा की थीं, जहां 'दवा की खुराक और सेवन के अंतराल' को बताने के लिए इसी तरह के कवर इस्तेमाल किये जा रहे हैं।
विवाद पैदा होने के बाद दोनों सरकारी अस्पतालों के अधिकारियों ने कर्मचारियों को हिंदी अक्षरों वाले इन कवरों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया है।
इस बीच तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के.जी. अरुणराज ने द्रमुक पर 'सस्ती राजनीति' करने का आरोप लगाया। उन्होंने बुधवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि दोनों अस्पतालों में इस्तेमाल किये जा रहे दवा के कवर मौजूदा टीवीके सरकार ने शुरू नहीं किये थे। उन्होंने कहा कि करूर में अस्पताल आम तौर पर मदुरै केंद्रीय जेल से कवर मंगाता था और उन पर दवा लेने के समय की जानकारी केवल तमिल में दी जाती थी। दिसंबर 2025 में हालांकि ऐसे कवरों की कमी होने के कारण चार लाख कवरों के लिए इरोड जिला मुद्रण औद्योगिक सहकारी समिति को आपातकालीन आदेश दिया गया था। यह आदेश 31 दिसंबर 2025 को पिछली द्रमुक सरकार के कार्यकाल में दिया गया था और इन कवरों का इस्तेमाल जनवरी 2026 में शुरू हुआ।
डॉ. अरुणराज ने दावा किया कि कोयंबटूर में इसी तरह के कवरों को करीब तीन साल पहले द्रमुक सरकार के कार्यकाल में चिंतामणि सहकारी समिति के माध्यम से आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी गयी थी और इस्तेमाल में लाया गया था। उन्होंने सवाल किया कि जब हिंदी वाले डिजाइन की शुरुआत उनके अनुसार द्रमुक के ही कार्यकाल में हुई थी, तो वह मौजूदा टीवीके सरकार की आलोचना क्यों कर रही है।
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