चेन्नई , मई 19 -- तमिलनाडु में गुरूवार को मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना है। इस विस्तार के साथ ही उनकी नयी सहयोगी बनी कांग्रेस छह दशक बाद सरकार में शामिल होगी। इस विस्तार के साथ ही यह तमिलनाडु की पहली गठबंधन सरकार होगी, जो शासन व्यवस्था में एक नये तरह के गठबंधन युग की शुरुआत करेगी।
वर्ष 2006 में जब द्रमुक बहुमत से पीछे रह गयी थी, तक उसने कांग्रेस व अन्य सहयोगियों के बाहरी समर्थन से पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। तब कांग्रेस ने सरकार में नहीं शामिल हो पायी थी, लेकिन इस बार उसने यह मौका हाथ से नहीं जाने दिया है और श्री विजय के मंत्रिपरिषद का हिस्सा बनने के प्रस्ताव को स्वीकार लिया है।
श्री विजय को मुख्यमंत्री के रूप में और सत्तारूढ़ तमिझगा वेट्री कषगम (टीवीके) के ही नौ अन्य मंत्रियों को पदभार संभाले एक सप्ताह से अधिक का समय हो गया है। इस लिहाज से यह कैबिनेट विस्तार काफी समय से लंबित है।
चूंकि राज्यपाल वीआर आर्लेकर बुधवार शाम को केरल से लौट रहे हैं, इसलिए गुरुवार को मंत्रिपरिषद के विस्तार की उम्मीद जतायी जा रही है।
पांच विधायकों वाली कांग्रेस को दो मंत्री पद मिलने की संभावना है। जहां कांग्रेस विधायक दल के नेता एस राजेश कुमार का मंत्री बनना तय माना जा रहा है, वहीं दूसरे पद के लिए पी. चिदंबरम गुट के समर्थक पी विश्वनाथन और महिला विधायक थारगई कथबर्ट के बीच कड़ा मुकाबला होने की खबरें हैं।
इसके साथ ही, 1967 के चुनावों में कांग्रेस की कामराज सरकार के सत्ता से हटने के बाद पहली बार इस राष्ट्रीय पार्टी की मंत्रिमंडल में जगह बनेगी। सन 1967 के उन चुनावों के बाद राज्य में द्रविड़ दलों के वर्चस्व की शुरुआत हुई थी। इसे विजय ने हालिया विधानसभा चुनावों में खत्म कर दिया है। दो मंत्री पदों के अलावा कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट भी मिलने की उम्मीद है। यह सीट अन्नाद्रमुक के बागी विधायक सीवी षणमुगम के इस्तीफे से खाली हुई थी। थोल थिरुमावलवन की पार्टी विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके), जिसने वामपंथी दलों और आईयूएमएल की तरह बिना किसी शर्त के 'बाहरी' समर्थन दिया है, उसके भी सरकार में शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि अभी इसकी पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी की मुख्य वजह अन्नाद्रमुक में चल रही अंदरूनी कलह और बगावत है। इसका निकट भविष्य में कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है। पूर्व मंत्रियों और कद्दावर नेताओं षणमुगम, एसपी वेलुमणि और सी विजय भास्कर के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पार्टी के निर्देश के खिलाफ जाकर विश्वास मत का समर्थन किया था। इसके बाद अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने इन 25 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क किया था।
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