चेन्नई , अक्टूबर 23 -- तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों ने मतदाताओं के बड़े पैमाने पर नाम हटाये जाने का कड़ा विरोध करते हुए और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सी. ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मांग दोहराते हुए, शुक्रवार को चुनाव आयोग की ओर से आहूत 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' (एसएसआर) पर सर्वदलीय बैठक के बीच बहिर्गमन कर दिया।

इन दलों में इंडिया गठबंधन (जिसमें मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाला सत्ताधारी टीवीके भी शामिल है), विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और 'नाम तमिलर काची' (एनटीके) शामिल हैं।

इन दलों के प्रतिनिधियों ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु की मतदाता सूची से हटाये गये 74 लाख से अधिक मतदाताओं को वापस शामिल करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाये गये कदमों पर अपनी बात रखने के बाद बैठक से बहिर्गमन कर दिया।

राज्य सचिवालय में तमिलनाडु की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अर्चना पटनायक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक से कुल 10 दलों ने बहिर्गमन किया, जबकि केवल तीन दलों - भाजपा ,एआईडीएमके और 'देशिया मक्कल काची' ने इसमें हिस्सा लिया।

टीवीके के नेतृत्व वाले 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्टोरियस अलायंस' (एसएसजेवीए) के सभी सहयोगियों के अलावा, तमिलनाडु में कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के सदस्यों ने भी बैठक से वॉकआउट किया। कांग्रेस और टीवीके के साथ-साथ वीसीके , एमडीएमके ,आईयूएमएल और दो वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक छोड़ी। ये वामपंथी दल विजय सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे है, लेकिन एसएसजेवीए में शामिल नहीं हुए थे, जबकि वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने रहे।

विपक्ष की ओर से और उसके एकमात्र सहयोगी दल डीएमडीके तथा अभिनेता-निर्माता सीमन की पार्टी एनटीके के प्रतिनिधियों ने भी बैठक से बहिर्गमन किया।

बाद में पत्रकारों से बात करते हुए वरिष्ठ टीवीके नेता और बिजली एवं कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाये जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुई गलतियों को सुधारे बिना, विशेष सारांश पुनरीक्षण(एसएसआर ) के नाम पर एक और पुनरीक्षण करना अनावश्यक है। उन्होंने कहा, "एसएसआर शुरू करने से पहले चुनाव आयोग को एसआईआर के दौरान हुई गलतियों को सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए। हमने बैठक में यह बात स्पष्ट रूप से रखी है।"मंत्री ने एसआईआर के विरोध में टीवीके के रुख को दोहराया और सीईसी (मुख्य चुनाव आयुक्त) को हटाए जाने की देशव्यापी मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में नहीं हटाए गए होते, तो टीवीके अप्रैल के चुनावों में आसानी से 160 सीटें जीत जाती।

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