चेन्नई , जनवरी 26 -- तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के विधानसभा में पारंपरिक नववर्ष का संबोधन देने से इनकार करने के बाद श्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार और लोकभवन के बीच हालिया खींचतान के बीच मुख्यमंत्री, सत्तारूढ़ द्रमुक और इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल के 'घर पर आयोजित स्वागत समारोह' का बहिष्कार किया है।

यह लगातार दूसरी बार है जब द्रमुक और उसके सहयोगी दल लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं, जो राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच बढ़ती खाई का संकेत देता है।

इस बीच द्रमुक ने राज्यपाल के खिलाफ अपनी बयानबाजी तेज कर दी है और उन्हें तमिल विरोधी करार दिया है।

मुख्यमंत्री स्टालिन, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और द्रमुक की संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि सहित वरिष्ठ पार्टी नेता सोमवार शाम को तंजावुर में 'विजयी तमिल महिला सम्मेलन' के रूप में आयोजित क्षेत्रीय महिला विंग सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।इसका आयोजन पार्टी की महिला शाखा की प्रमुख सुश्री कनिमोझी कर रही हैं।

श्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शाम को तंजावुर में मुलाकात होगी।"पिछले वर्ष की तरह इस साल भी बहिष्कार की वजह यह है कि महामहिम रवि ने राज्यपाल के लिये तैयार किये गये उस पारंपरिक भाषण को देने से इनकार कर दिया, जिसे राज्य सरकार ने तैयार किया था और यह कारण बताकर उठकर चले गये थे कि राष्ट्रगान शुरू में नहीं बजाया गया, जबकि उसे दिन के अंत में बजाया जाता रहा है। तमिलनाडु की विधानसभा में शुरुआत में 'तमिल थाई वझथु' (मातृभूमि तमिल की स्तुति) बजाने की परंपरा है।

दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद आज श्री स्टालिन ने मरीना समुद्र तट पर ध्वजारोहण समारोह में राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल ने यहां राष्ट्रीय तिरंगा फहराया और सलामी ली।

अपने गणतंत्र दिवस संदेश में श्री स्टालिन ने कहा, "आइए एक बहुलतावादी भारत का जश्न मनाएं। भारत की इस विशाल भूमि पर अनगिनत भाषाएं, जातियां और संस्कृतियां फल-फूल रही हैं। विविधता में एकता सदियों पुरानी राष्ट्रीय विशेषता है। जब हम आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ रहते हैं तो पूरा भारत एकजुट होकर उठता है।" प्रत्येक भाषा, जातीयता और संस्कृति अद्वितीय है, और वे एक दूसरे का सम्मान और पोषण करते हैं। हमारी शक्ति बहुलता में है, समरूपता में नहीं। आइए बहुलतावादी भारत का जश्न मनाएं।

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