चेन्नई , सितंबर 19 -- नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख शनिवार को समाप्त होने के बाद तमिलनाडु में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए आरक्षित मदुरांतकम और धारापुरम सीटों पर कुल 49 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं।
इन दोनों सीटों पर विद्रोही अन्नाद्रमुक विधायकों के इस्तीफे के कारण उपचुनाव हो रहे हैं। कुल 99 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें से 50 स्वीकार किए गए, जबकि जांच के दौरान 49 नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। इनमें अधिकांश निर्दलीय उम्मीदवारों के थे।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मदुरांतकम में दाखिल कुल 48 नामांकन पत्रों (35 पुरुष और 13 महिलाएं) में से 28 स्वीकार और 20 खारिज किए गए। धारापुरम में कुल 51 उम्मीदवारों (23 पुरुष और 28 महिलाएं) ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें से 22 स्वीकार और 29 खारिज कर दिए गए।सूत्रों ने बताया कि सत्तारूढ़ टीवीके, विपक्षी द्रमुक, अन्नाद्रमुक, नाम तमिलर काची (एनटीके), भाकपा और माकपा सहित कुल छह प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के नामांकन सही पाए गए और स्वीकार कर लिए गए।
नाम वापसी के अंतिम दिन शनिवार को एक निर्दलीय महिला उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद मदुरांतकम सीट पर 27 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। धारापुरम में किसी उम्मीदवार ने नामांकन वापस नहीं लिया और वहां 22 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
पांच-कोणीय मुकाबले में सत्तारूढ़ टीवीके ने अन्नाद्रमुक छोड़कर पार्टी में शामिल हुईं के मरगाथम कुमारवेल (मदुरांतकम) और पी. सत्यबामा (धारापुरम) को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने अन्नाद्रमुक छोड़कर टीवीके में शामिल होने से पहले संबंधित सीटों का प्रतिनिधित्व किया था, जिसके कारण उपचुनाव की स्थिति बनी। मदुरांतकम में मरगाथम कुमारवेल के अलावा द्रमुक के आई. परंथमन, अन्नाद्रमुक की पूर्व विधायक कनिता संपत, माकपा की पी. सुगंती और नाम तमिलर काची (एनटीके) के के. जानकीरामन चुनाव मैदान में हैं। धारापुरम में सत्यबामा (टीवीके), सुगन्या (द्रमुक), अन्नाद्रमुक की के. भानुमति, भाकपा के पी. लक्ष्मणन और एनटीके की एम. कार्तिका प्रमुख उम्मीदवार हैं। शेष उम्मीदवार निर्दलीय हैं।वाम दलों के चुनाव मैदान में उतरने से इन उपचुनावों का मुकाबला पांच-कोणीय हो गया है। वाम दल अब तक टीवीके सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे। इन उपचुनावों को चार महीने पुरानी विजय सरकार के लिए जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है।
वाम दलों के चुनाव मैदान में उतरने के फैसले और साथ ही टीवीके सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं होने तथा सरकार को बाहर से समर्थन जारी रखने के उनके रुख से राजनीतिक हलकों में, विशेषकर टीवीके और उसके अन्य सहयोगी दलों के बीच, हैरानी जताई गई है।
भाकपा के प्रदेश सचिव एम. वीरापांडियन और माकपा के प्रदेश सचिव पी. शनमुगम ने अपने फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि वे तीनों प्रमुख मोर्चों में से किसी का हिस्सा नहीं हैं। इनमें कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके के साथ सत्तारूढ़ टीवीके का गठबंधन, द्रमुक के नेतृत्व वाला एसपीए, जो चुनाव के बाद हुए दलबदल के बाद अब अपने एकमात्र सहयोगी डीएमडीके के साथ रह गया है, तथा भाजपा, पीएमके और एएमएमके वाला अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाला एनडीए शामिल है। शनमुगम ने स्पष्ट रूप से कहा कि टीवीके का समर्थन नहीं करने का अर्थ यह नहीं है कि वाम दल उपचुनाव में परोक्ष रूप से द्रमुक का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है और स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा, "हम तीनों में से किसी भी मोर्चे का हिस्सा नहीं हैं। हमने चुनाव लड़ने का फैसला किया है, क्योंकि यह न तो आम चुनाव है और न ही सरकार बदलने के उद्देश्य से कराया जा रहा है। यह उपचुनाव है और हमने (भाकपा और माकपा ने) तीनों मोर्चों के खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं।"इस बीच, पड़ोसी पुड्डुचेरी की थट्टांचावडी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। चार-कोणीय मुकाबले में प्रमुख उम्मीदवारों में एनडीए के तहत चुनाव लड़ रहे सत्तारूढ़ एआईएनआरसी के उम्मीदवार एवं पूर्व विधायक अशोक आनंद, टीवीके के सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के ई. विनयागम, द्रमुक के के. सेतू उर्फ सेतुसल्वम और भाकपा के ए. मोहम्मद सलीम शामिल हैं।
यह उपचुनाव मुख्यमंत्री और एआईएनआरसी के संस्थापक एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है। उन्होंने नौ अप्रैल को हुए चुनाव में दो सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में मंगलम सीट को अपने पास रखने का फैसला किया था।
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