चेन्नई , अप्रैल 20 -- आयकर विभाग ने अचानक और चौंकाने वाले घटनाक्रम में सोमवार को तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थागाई के ठिकानों पर छापेमारी की।

श्री सेल्वापेरुन्थागाई श्रीपेरंबुदूर (आरक्षित) सीट से पुन: चुनाव लड़ रहे हैं। इस कार्रवाई ने तीव्र राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।

मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने इस कार्रवाई को चुनाव प्रचार को बाधित करने के लिए राजनीति से प्रेरित कदम बताया है। वहीं टीएनसीसी अध्यक्ष ने खुद आरोप लगाया कि तलाशी अभियान के बहाने उन्हें 'अवैध' रूप से बंधक बनाकर रखा गया।

श्री सेल्वापेरुन्थागाई के परिसरों पर हुई छापेमारी का कारण अब तक अज्ञात है। यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनावी राज्य तमिलनाडु में महत्वपूर्ण प्रचार अभियान के दूसरे और अंतिम चरण के साथ मेल खाती है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान होना है।

इन छापों की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने तलाशी के बहाने उन्हें श्रीपेरंबुदूर चुनाव क्षेत्र में 'अवैध' रूप से रोककर रखा और उन्हें चुनावी कार्य करने से वंचित कर दिया।

उन्होंने अपने 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट में आरोप लगाया, "राजनीतिक रूप से इस संवेदनशील समय पर की गयी यह सोची-समझी कार्रवाई लोकतांत्रिक कामकाज में बाधा डालने और विपक्ष की गतिविधियों को कमजोर करने का एक स्पष्ट और सुनियोजित प्रयास है।"उन्होंने कहा, "इस छापामारी का समय इसके वास्तविक इरादे को उजागर करता है। यह कानून का प्रवर्तन नहीं, बल्कि डराना-धमकाना है। यह असहमति को दबाने, भागीदारी को प्रतिबंधित करने और विपक्षी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के बीच भय का माहौल पैदा करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के परेशान करने वाले स्वरूप को दर्शाता है।"श्री सेल्वापेरुन्थागाई ने इसे सत्ता का घोर दुरुपयोग और लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर हमला बताते हुए कहा कि उन्हें अपने राजनीतिक कर्तव्यों का पालन करने और जनता से जुड़ने से प्रभावी रूप से रोक दिया गया है। उन्होंने स्वतंत्र आवाजाही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक जुड़ाव की रक्षा का आह्वान करते हुए दुख जताया "जब कानून की रक्षा के लिए बनी संस्थाओं का उपयोग राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया जाता है, तो इससे जनता का विश्वास कम होता है और हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली की अखंडता को नुकसान पहुंचता है।"इसकी कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करार दिया और कहा, "किसी भी तरह की धमकी हमें जनता की सेवा करने और न्याय, निष्पक्षता एवं लोकतंत्र के मूल्यों को बनाये रखने के हमारे कर्तव्य से पीछे नहीं हटा सकती।"टीएनसीसी प्रमुख ने कहा, "चूंकि श्री गांधी आज महत्वपूर्ण चुनाव अभियान के लिए तमिलनाडु आ रहे हैं। ऐसे में आयकर विभाग ने हिंदी भाषी अधिकारियों के साथ 'तलाशी' के बहाने मुझे श्रीपेरंबुदूर विधानसभा क्षेत्र के भीतर अवैध रूप से बंधक बना लिया है, जिससे मैं अपने राजनीतिक कर्तव्यों का पालन करने और लोगों से जुड़ने से वंचित हो गया हूं। राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में की गयी यह सोची-समझी कार्रवाई, लोकतांत्रिक कामकाज में बाधा डालने और विपक्ष की गतिविधियों को कमजोर करने का स्पष्ट और सुनियोजित प्रयास है।"उन्होंने कहा, "मैं राजनीति से प्रेरित इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के ऐसे प्रयासों के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता हूं। किसी भी स्तर की डराने-धमकाने की राजनीति हमें जनता की सेवा करने और न्याय, निष्पक्षता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाये रखने के हमारे कर्तव्य से डिगा नहीं सकती।"इस बीच कड़ी निंदा करते हुए श्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे टीएनसीसी अध्यक्ष के चुनाव अभियान को विफल करने की साजिश करार दिया।उन्होंने लिखा कि तमिलनाडु की जनता केंद्र की भाजपा सरकार के इन दमनकारी कृत्यों का करारा जवाब देगी। हार के डर से विपक्ष को बाधित करने की कोशिश में वे यह भूल रहे हैं कि चुनाव का समय है और प्रचार खत्म होने में 48 घंटे भी नहीं बचे हैं।

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