चेन्नई , अगस्त 08 -- तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम, (द्रमुक) अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) तथा उनके मौजूदा सहयोगी दलों ने प्रस्तावित परिसीमन पर सत्तारूढ़ तमिल वेट्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के मुख्यमंत्री विजय द्वारा शनिवार को बुलायी गयी सर्वदलीय सांसद बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

इन दलों ने इसके बजाय मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय से महत्वपूर्ण कावेरी मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने और पहले इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि अचानक सांसदों की बैठक बुलाना जनता का ध्यान कावेरी मुद्दे से भटकाने का प्रयास है।

द्रमुक, उसकी सहयोगी डीएमडीके तथा अभिनेता से नेता बने कमल हासन की मक्कल नीधि मायम (एमएनएम) बैठक का बहिष्कार करेगी। उनका कहना है कि यह बैठक अनावश्यक है और इस विषय पर चर्चा के लिए कुछ नया नहीं है, खासकर तब जब भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से संसद में परिसीमन संशोधन विधेयक पेश किये जाने के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

एक अन्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और उसका सहयोगी पीएमके भी बैठक का बहिष्कार करेगा। टीवीके सरकार के सहयोगी और उसके समर्थन वाले दलों के बैठक में शामिल होने की संभावना है। इनमें कांग्रेस, वीसीके, भाकपा, माकपा और आईयूएमएल शामिल हैं। तमिलनाडु में कुल 59 सांसद हैं, जिनमें लोकसभा के 39 और राज्यसभा के 18 सदस्य शामिल हैं।

परिसीमन के मुद्दे पर भाजपा द्वारा विपक्षी दलों से समर्थन मांगने के बीच डीएमके ने इससे पहले इंडिया गठबंधन के हिस्से के रूप में इसका कड़ा विरोध किया था। पार्टी ने संसद में परिसीमन संबंधी प्रस्ताव आने पर उसकी प्रतियां तक फाड़ दी थीं और उसे पराजित कराने में भूमिका निभायी थी।

अब ऐसा प्रतीत होता है कि द्रमुक ने अपना रुख कुछ नरम किया है। पार्टी ने कहा है कि वह संसद में पेश किये जाने वाले विधेयक की पूरी विषय-वस्तु देखने के बाद ही कोई निर्णय लेगी। यह संकेत माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस द्वारा संबंध तोड़े जाने के बाद इंडिया गठबंधन से दूरी बनाने वाली द्रमुक केंद्र सरकार के करीब जा रही है।

द्रमुक संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने एक बयान में कहा कि परिसीमन का विरोध करने के पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने द्रमुक द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठक में पारित प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को अगले 30 वर्षों के लिए स्थगित किया जाना चाहिए और इस संबंध में संसद में संशोधन लाया जाना चाहिए।

उन्होंने वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये उस आश्वासन का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि परिसीमन की प्रक्रिया 1971 की जनगणना के आधार पर की जाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से 2026 से अगले 30 वर्षों के लिए परिसीमन को स्थगित रखने का आश्वासन देने की मांग की।श्रीमती कनिमोझी ने कहा कि संसद में तमिलनाडु का मौजूदा 7.18 प्रतिशत प्रतिनिधित्व कम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र से 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए भी संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु परिसीमन के खिलाफ नहीं है, लेकिन पिछले 50 वर्षों में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक कल्याण योजनाओं और जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्य को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि द्रमुक ऐसी 'निष्पक्ष परिसीमन' प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे तमिलनाडु का संसदीय प्रतिनिधित्व कम न हो। उन्होंने कहा, " द्रमुक अपने इस रुख पर कायम है और तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व को कम करने वाले किसी भी कदम का निश्चित रूप से विरोध करेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।"कावेरी और मेकेदातु जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी दलों द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग के बीच टीवीके अब तक इन मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है। कनिमोझी ने आरोप लगाया कि टीवीके ने किसी भी दल से परामर्श किये बिना जल्दबाजी में परिसीमन पर सर्वदलीय सांसद बैठक बुला ली है।

उन्होंने कहा कि यह जनता का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से किया गया 'राजनीतिक नाटक' है। उन्होंने तमिलनाडु के सभी सांसदों से एकजुट होकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मिलने और विधानसभा तथा कावेरी से संबंधित प्रस्ताव की प्रति उन्हें सौंपने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्याश्री विजय तमिलनाडु सरकार के प्रतिनिधियों को इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हैं।

इस बीच, तीन राज्यसभा सांसदों वाली अन्नाद्रमुक के सूत्रों ने बताया कि पार्टी बैठक का बहिष्कार करेगी। पार्टी ने कहा कि सांसदों की बैठक बुलाने से पहले विजय को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से चर्चा करनी चाहिए थी। पार्टी ने इसकी तुलना इस तरह की कि जैसे कोई निर्माता वितरकों को दरकिनार कर सीधे सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज कर दे।

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