जयपुर , जून 11 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय के एक कर्मचारी की जयपुर से मुंबई तबादले के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि तबादला नीति केवल प्रशासनिक दिशा-निर्देश होती है, यह कर्मचारियों को कोई प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान नहीं करती।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने अपने जयपुर से मुंबई स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए दलील दी थी कि विभाग ने अपनी निर्धारित तबादला नीति का पालन नहीं किया है। इस आधार पर तबादला आदेश को मनमाना और अनुचित बताया गया।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्थानांतरण सेवा का एक सामान्य हिस्सा है और नियोक्ता को प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों के तबादले का अधिकार प्राप्त है। न्यायालय ने यह भी माना कि तबादला नीति केवल मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में कार्य करती है और इससे किसी कर्मचारी के पक्ष में ऐसा वैधानिक अधिकार उत्पन्न नहीं होता, जिसे अदालत में लागू कराया जा सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब तक तबादला आदेश दुर्भावनापूर्ण, भेदभावपूर्ण अथवा किसी वैधानिक प्रावधान के प्रतिकूल साबित नहीं होता, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती। केवल तबादला नीति के उल्लंघन का आरोप लगाकर स्थानांतरण आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ उच्च न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय के कर्मचारी की याचिका को खारिज कर दिया और जयपुर से मुंबई तबादले के आदेश को बरकरार रखा।
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