पंतनगर , अक्टूबर 03 -- उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (अप्रा) गुरमीत सिंह ने शनिवार को पंतनगर स्थित प्रसिद्ध गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय किसान मेले का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह मेला किसान, विज्ञान, युवा, उद्यमिता और नई तकनीक को एक मंच पर जोड़ने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि किसान केवल खेत का स्वामी नहीं राष्ट्र के भविष्य का निर्माता है। पंतनगर विश्वविद्यालय को उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसान सेवा का महत्वपूर्ण ज्ञान-केंद्र बताया और कहा कि इस ज्ञान को उत्तराखण्ड के हर कृषि क्षेत्र और हर किसान तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसान आज जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल संकट, उत्पादन लागत, श्रम की कमी और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों के बीच खेती कर रहा है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता, संस्थागत ऋण और फसल जोखिम से सुरक्षा देने का प्रयास कर रही है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसान रजिस्ट्री, मौसम और उपग्रह आधारित जानकारी तथा एआई और बिग डेटा जैसी तकनीकों को कृषि से जोड़ा जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि एआई मौसम पूर्वानुमान, फसल रोगों की शुरुआती पहचान, मिट्टी के विश्लेषण, सिंचाई की जरूरत तय करने और उत्पादन के अनुमान में उपयोगी हो सकती है। ड्रोन खेतों की निगरानी और छिड़काव में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत घटाना, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और किसान के निर्णय को सटीक बनाना होना चाहिए। उनके अनुसार एआई और डिजिटल कृषि का लाभ अब छोटे और सीमांत किसानों तक भी पहुंच रहा है। उत्तराखण्ड की विविध भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हर जगह एक ही कृषि मॉडल लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल विकसित करने होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में कम भूमि से अधिक मूल्य देने वाली फल, सब्जी, पुष्प, सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां आय के नए रास्ते खोल सकती हैं। उन्होंने बीज से उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि किसान अब कृषि उद्यमी बन रहे हैं और किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएं, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयां गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं। उन्होंने परंपरागत फसलों, स्थानीय बीजों और पीढ़ियों के कृषि ज्ञान को धरोहर बताते हुए इसे आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की बात कही।
कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने इस अवसर पर कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय के बीज एक ब्रांड हैं और सभी किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार किसानों के हित में काम कर रही है और सभी किसानों को किसान सम्मान निधि दी जा रही है।
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