फर्रुखाबाद , अप्रैल 30 -- उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे के रूट को लेकर उठे सियासी विवाद के बीच भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने गुरुवार को विरोधियों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि तकनीकी कारणों को राजनीतिक रंग देना बंद किया जाना चाहिए। शहर के आवास विकास स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सांसद श्री राजपूत ने स्पष्ट किया कि गंगा एक्सप्रेसवे का रूट परिवर्तन किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि तकनीकी मजबूरी के चलते लिया गया निर्णय है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे को संभल, बदायूं और शाहजहांपुर जैसे जिलों से जोड़ा गया है, जबकि फर्रुखाबाद को नजरअंदाज नहीं किया गया है। जनपद को जोड़ने के लिए 91 किलोमीटर लंबी लिंक रोड का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी लागत लगभग 7600 करोड़ रुपये है। यह लिंक रोड आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, चित्रकूट एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगी तथा आगे हरिद्वार तक कनेक्टिविटी का मार्ग प्रशस्त करेगी।
सांसद ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक उद्देश्य से भ्रम फैला रहे हैं और मामले को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े एनजीटी के दस्तावेजों का अध्ययन करने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
जनप्रतिनिधियों की क्षमता पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए श्री राजपूत ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि कमजोर होते तो जिले में इतने विकास कार्य संभव नहीं होते। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बना और कन्नौज तक सीमित रहा, तब फर्रुखाबाद को क्यों नहीं जोड़ा गया, जबकि उस समय जिले के सभी विधायक सपा के थे।
उन्होंने जिले में चार रेलवे फ्लाईओवर, तीन पावर हाउस और अन्य विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि केंद्र और प्रदेश की "डबल इंजन" सरकार में फर्रुखाबाद निरंतर विकास की दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा, जिलाउपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत, कोषाध्यक्ष संजीव गुप्ता और मीडिया प्रभारी शिवांग रस्तोगी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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