रांची , फरवरी 24 -- झारखंड में उडीसे पोर्टल की ड्रॉपबॉक्स सूची को अद्यतन एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए अब विशेष अभियान चलाया जाएगा।

इस अभियान के तहत ड्रॉपबॉक्स में दर्ज विद्यार्थियों के नाम, नामांकन स्थिति और वास्तविक उपस्थिति का गहन सत्यापन किया जाएगा। साथ ही, ड्रॉपबॉक्स सूची का मिलान शिशु पंजी सर्वे में प्राप्त आंकड़ों से किया जाएगा, ताकि विद्यालय से बाहर रह गए या ड्रॉपआउट चिह्नित बच्चों की सही पहचान सुनिश्चित हो सके।

विद्यालय के बच्चो का उडीसे अद्यतित करने के क्रम में विभिन्न प्रकार से विद्यालय के बच्चो का नाम शिक्षकों के द्वारा उडीसे के ड्राप बॉक्स सूची में डाला गया है। इनमे स्कूल से ड्राप आउट हो चुके बच्चे, अगली क्लास में बच्चे का प्रोग्रेशन, पास आउट बच्चे, ड्राप आउट बच्चे, किसी अन्य माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चे, माइग्रेशन, कक्षा 12वीं से पास आउट, बच्चे के डाटा में दोहराव, उडीसे में बच्चों के डेटा को स्कूल में गलत मैप करना इतियादी शामिल है। ऐसे ड्राप बॉक्स सूची में डाले गए बच्चो के सत्यापन और विद्यालय द्वारा इम्पोर्ट/पुल कराने के सम्बन्ध में पूर्व में भी विभाग द्वारा निर्देश दिया गया है। मगर अबतक विद्यालयों, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी और प्रखंड एमआईएस द्वाराउडीसे के ड्राप बॉक्स सूची को अद्यतित नहीं कराया गया है।

यदि किसी विद्यालय के ड्रॉप-बॉक्स में किसी छात्र का नाम दर्ज है, तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक अथवा शिक्षक को उस छात्र के अभिभावकों से संपर्क कर बच्चे को पुनः विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करना होगा। इसके बाद छात्र को विद्यालय में नामांकित कर उडीसेपोर्टल के माध्यम से इम्पोर्ट/पुल की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी।

बच्चों के सत्यापन के दौरान यदि यह पाया जाता है कि ड्रॉपआउट घोषित छात्र का नाम किसी अन्य विद्यालय में दर्ज हो चुका है, तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक या शिक्षक को उस विद्यालय से संपर्क स्थापित कर जानकारी प्राप्त करनी होगी। जिस विद्यालय में छात्र वर्तमान में नामांकित है, वहां के प्रधानाध्यापक से समन्वय स्थापित करते हुए छात्र को वर्तमान विद्यालय के उडीसे में पुल किया जाएगा। यदि वर्तमान में नामांकित विद्यालय द्वारा छात्र को पूर्व विद्यालय से उडीसे में पूल/इंपोर्ट नहीं किया जाता है, तो पूर्व विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा ऐसे छात्रों की सूची तैयार कर संबंधित प्रखंड कार्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद नियमानुसार संबंधित विद्यालय में छात्र का पूल/इंपोर्ट सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी एवं ब्लॉक एमआईएस समन्वयक की होगी।

राज्य में विद्यार्थियों के नामांकन और उड़िसे डेटा को अद्यतन रखने के लिए शिक्षा विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश पूर्व में जारी किए है। जिसमे स्पष्ट रूप से ट्रांसफर सर्टिफिकेट , अन्य शिक्षा माध्यमों में अध्ययन तथा माइग्रेशन से जुड़े मामलों में विद्यालयों की जवाबदेही तय की गई है। यदि कोई छात्र किसी विद्यालय से टीसी लेकर दूसरे विद्यालय में नामांकित हो चुका है, लेकिन नए विद्यालय द्वारा उड़िसे अद्यतित नहीं किया गया है, तो जिस विद्यालय के ड्रॉप-बॉक्स में छात्र का नाम प्रदर्शित हो रहा है, उस विद्यालय के प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्र या उसके अभिभावक से संपर्क कर वर्तमान नामांकित विद्यालय की जानकारी प्राप्त करें। इसके बाद संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक से समन्वय स्थापित कर छात्र को उडिसे में 'पूल' कर अद्यतन करने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। यदि वर्तमान नामांकित विद्यालय द्वारा छात्र का उड़िसे में पूल/इंपोर्ट नहीं किया जाता है, तो पूर्व नामांकित विद्यालय के प्रधानाध्यापक ऐसे छात्रों की सूची तैयार कर प्रखंड कार्यालय को प्रेषित करेंगे।

।इसी प्रकार यदि कोई छात्र किसी अन्य शिक्षा माध्यम से पढ़ाई कर रहा है, तो ऐसे मामलों में भी सत्यापन कराया जाएगा। यदि यह पाया जाता है कि छात्र अब तक पूर्व माध्यम में अध्ययनरत है या ड्रॉपआउट हो चुका है, तो उसे पुनः विद्यालय से जोड़ते हुए संबंधित विद्यालय द्वारा उड़िसे अपडेट किया जाएगा। इस प्रक्रिया की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के लिए ब्लॉक एमआईएस कोऑर्डिनेटर को निर्देशित किया गया है।

वहीं, स्थानांतरण के मामलों में भी विद्यालयों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई छात्र स्थानांतरित हुआ है, तो संबंधित विद्यालय के शिक्षक छात्र या अभिभावक से संपर्क कर यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्र अब भी माइग्रेटेड है या वापस अपने गृह स्थान लौट आया है। यदि छात्र लौट चुका है, तो उसे विद्यालय में पुनः नामांकित कर ड्रॉप-बॉक्स से पूल/इंपोर्ट करते हुए U-DISE अपडेट किया जाएगा। यदि छात्र अब भी माइग्रेटेड स्थान पर है, तो उस स्थान पर नामांकन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर संबंधित विद्यालय का विवरण संकलित किया जाएगा, ताकि वहां उड़िसे अपडेट सुनिश्चित किया जा सके।

।।ड्रॉप-बॉक्स में विद्यार्थियों के डुप्लीकेट एवं गलत मैपिंग मामलों के निष्पादन को लेकर शिक्षा विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने संबंधित विद्यालयों और जिला स्तरीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

।राज्य में विद्यालय से बाहर रह गए और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान के लिए डहर 2.0 पोर्टल के माध्यम से शिशु पंजी सर्वे कराया जा रहा है। जिला-वार अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार अब तक राज्य में कुल 93.35 प्रतिशत सर्वे कार्य पूर्ण किया जा चुका है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राज्य के 35,173 विद्यालयों के 55,23,826 परिवारों को सर्वे हेतु टैग किया गया, जिसमे 43,34,307 परिवारों का सर्वे कार्य पूरा किया जा चुका है। जिला-वार प्रगति की बात करें तो गिरिडीह जिले ने 100 प्रतिशत सर्वे पूर्ण कर राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे जिलों ने भी 97 प्रतिशत से अधिक प्रगति दर्ज की है।

वहीं, कुछ जिलों में सर्वे कार्य प्रगति पर है, जहां लंबित विद्यालयों में सर्वे को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिया गया हैं। राज्य स्तर से सर्वे की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है तथा शेष कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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