मुंबई , सितंबर 11 -- महाराष्ट्र में कल्याण जिला एवं सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में जुलाई में हुई डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट के मामले में शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे और चार अन्य के खिलाफ आरोप तय किये।

सभी पांच आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया। आरोपी कल्याण फास्ट ट्रैक कोर्ट में न्यायाधीश एन.पी. वसाडे के समक्ष पेश हुए। इस मामले में कल्याण पुलिस द्वारा 1,832 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद यह पहली सुनवाई थी।

अदालत ने सभी पांच आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किये। पुलिस ने छह जुलाई को हुई घटना के 65 दिन बाद बुधवार को आरोपपत्र दाखिल किया। बंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच में तेजी लायी गयी थी और यह जांच कल्याण जोन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अतुल जेंडे की निगरानी में की गयी।

म्हात्रे की ओर से पेश अधिवक्ता उमर काजी ने कहा कि आरोपपत्र में बड़ी संख्या में दस्तावेज और साक्ष्य शामिल हैं तथा बचाव पक्ष को इन सामग्रियों का अध्ययन करने के लिए समय दिया जाना चाहिए।

बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपों को लेकर अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों ने अपनी दलीलें पेश कीं। इसके बाद अदालत ने आरोपपत्र में लगायी गयी धाराओं के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये।

इस मामले में अगली कार्यवाही 15 सितंबर से बीएनएस की धारा 330 के तहत शुरू होगी। अभियोजन पक्ष से दस्तावेजों की सूची पेश किये जाने की उम्मीद है। इसके बाद बचाव पक्ष बतायेगा कि वह किन दस्तावेजों को स्वीकार करता है और किन दस्तावेजों पर आपत्ति है। इसके बाद मामले की कार्यवाही गवाहों और साक्ष्यों की जांच की ओर बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता प्रकाश सालसगियांकर पैरवी कर रहे हैं।

पुलिस ने घटना के दौरान मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों समेत 32 गवाहों के बयान दर्ज किये हैं। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और फोरेंसिक सामग्री की भी जांच की। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच कराई गयी और मामले के रिकॉर्ड में शामिल करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि की गयी।

यह मामला छह जुलाई की उस घटना से संबंधित है, जिसमें म्हात्रे और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर डॉक्टर वैभव सालुंखे और डॉक्टर श्रुति बाविस्कर के साथ मारपीट की तथा नर्सिंग कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया था। आरोप है कि उन्होंने ऐसा इस शिकायत के बाद किया कि प्रसव के लिए अस्पताल आयी एक महिला को उचित उपचार और एनआईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी।

पुलिस ने घटना के अगले दिन कथित तौर पर मारपीट में शामिल चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद चिकित्सा जगत में विरोध और आक्रोश फैल गया था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए महाराष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। बाद में अदालत ने 15 जुलाई को कल्याण की अदालत द्वारा म्हात्रे को दी गयी जमानत पर रोक लगा दी और जमानत के आदेश को ''विकृत'' बताते हुए उसे रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने इस घटना को चिकित्सा व्यवस्था पर 'हमला' बताया था। इसके बाद म्हात्रे को कल्याण की आधारवाड़ी जेल भेज दिया गया, जहां वह 20 दिनों तक रहे।

सात अगस्त को उच्च न्यायालय ने कड़ी शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी थी और उन्हें तथा तीन पुरुष सह-आरोपियों को गोवा के अंजुना स्थित एक रिसॉर्ट में रहने का निर्देश दिया था। उन्हें आरोप तय होने के बाद ही महाराष्ट्र लौटने की अनुमति दी गयी थी। म्हात्रे आठ अगस्त से गोवा में रह रहे हैं, जबकि सह-आरोपी साधना करांडे अब भी आधारवाड़ी जेल में बंद हैं।

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