मुंबई , अगस्त 07 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को डोंबिवली अस्पताल हमला मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया और मामले को त्वरित सुनवाई के लिए कल्याण की फास्ट-ट्रैक अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
अदालत ने जमानत की शर्त के रूप में निर्देश दिया कि आरोपपत्र दाखिल होने तक पार्षद म्हात्रे महाराष्ट्र की सीमा से बाहर रहेंगे। कुछ सप्ताह पहले उच्च न्यायालय ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर कल्याण मजिस्ट्रेट अदालत से म्हात्रे को मिली जमानत रद्द कर दी थी। मौजूदा घटनाक्रम उसी के बाद सामने आया है।
गौरतलब है कि पार्षद म्हात्रे को उनके चार सहयोगियों के साथ आठ जुलाई को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब उन्होंने छह जुलाई को डोंबिवली के शास्त्री नगर नगर निगम अस्पताल में दो डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों से मारपीट की थी। यह घटना एक नवजात को एनआईसीयू में बिस्तर न मिलने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई थी। इस हमले के बाद पूरे राज्य में चिकित्सा बिरादरी ने व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और डॉक्टरों ने 22 जुलाई को काम से दूर रहने की चेतावनी दी थी।
कल्याण के मजिस्ट्रेट ने 14 जुलाई को गिरफ्तारी के बाद म्हात्रे की चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। चार दिन बाद 18 जुलाई को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखड की खंडपीठ ने शनिवार को विशेष सुनवाई के दौरान इस आदेश पर रोक लगा दी।
खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को अनुचित करार दिया और सार्वजनिक अस्पताल में हुए हमले की 'गंभीरता और संवेदनशीलता' का हवाला दिया।
उच्च न्यायालय ने तब म्हात्रे को 19 जुलाई तक विष्णु नगर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर उनकी अचल संपत्ति कुर्क की जा सकती है। पुलिस ने कहा था कि म्हात्रे के खिलाफ अतीत में 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 17 में उन्हें बरी कर दिया गया था।
ताजा आदेश के साथ उच्च न्यायालय ने अब शर्तों के साथ रिहाई और त्वरित सुनवाई का विकल्प चुना है, जिससे मामला कल्याण की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेज दिया गया है।
न्यायालय ने अभी तक अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।
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