प्रयागराज , जुलाई 13 -- पंडवानी गायन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण से सम्मानित महान लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई की अस्थियां सोमवार को तीर्थराज प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम में पूरे वैदिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ विसर्जित की गईं। इस दौरान भावुक माहौल में परिजनों, कला जगत से जुड़े लोगों और उनके प्रशंसकों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। अस्थि विसर्जन के समय उनके पुत्र दिलहरण पारधी, पौत्र सौरभ पारधी, नाती झाकेश्वर देशमुख समेत परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कला और संस्कृति से जुड़े अनेक लोगों ने भी संगम तट पर पहुंचकर महान लोक कलाकार को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक कला और रंगमंच जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। पंडवानी गायन को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

उल्लेखनीय है कि पंडवानी की महान साधिका डॉ. तीजन बाई का 5 जुलाई, 2026 को लंबी बीमारी के बाद रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन से देश-विदेश के कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई थी। सोमवार को उनके परिजनों ने उनकी अस्थियों का संगम में विसर्जन कर उन्हें अंतिम विदाई दी।

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