नयी दिल्ली , मई 20 -- भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और न्यूक्लियर मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा की।
डॉ. सिंह ने आज कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविध और विशाल आनुवंशिक (जेनेटिक) डेटा क्षमता है, जो वैश्विक स्तर पर प्रिसीजन मेडिसिन, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के अनुसंधान में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने बताया कि एआई आधारित जांच, सीक्वेंसिंग तकनीक और तेज परीक्षण प्रणालियां स्वास्थ्य सेवाओं में समय की बचत करेंगी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन, सेंसिंग और क्वांटम मैटेरियल्स के लिए चार थीमैटिक हब स्थापित किए गए हैं। आठ वर्षों के लक्ष्य वाले मिशन में भारत ने मात्र तीन वर्षों में आधे से अधिक लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने परमाणु क्षेत्र और न्यूक्लियर मेडिसिन से जुड़े अनुसंधान व निवेश को निजी क्षेत्र के लिए खोलने का बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। उन्होंने संकेत दिया कि इससे संबंधित अंतिम नियम आने वाले कुछ हफ्तों में जारी किए जा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने अनुसंधान, विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह फंड निजी क्षेत्र को अनुसंधान और नवाचार में भागीदार बनाने के लिए 2 से 3 प्रतिशत ब्याज दर पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
डॉ. सिंह ने अमेरिकी निवेशकों, कंपनियों और शोध संस्थानों के साथ नियमित कार्य समूह गठित करने का प्रस्ताव भी रखा, जो हर महीने बैठक कर निवेश, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ा सके।
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