ऋषिकेश , अक्टूबर, 15 -- भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर परमार्थ निकेतन में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वैश्विक हाथ धुलाई दिवस के तहत स्वच्छता, स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देते हुए परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों को साबुन से सही तरीके से हाथ धोने के प्रति जागरूक किया और साबुन वितरित किए।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन ज्ञान, विनम्रता, राष्ट्रसेवा और युवाओं के सपनों को साकार करने की प्रेरणा देता है। विज्ञान को मानवता की सेवा से जोड़ने और भारत को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने का उनका संकल्प आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी की प्रतिभा, चरित्र और संकल्प ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।
वैश्विक हाथ धुलाई दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि स्वच्छ हाथ स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी हैं। साबुन से नियमित और सही तरीके से हाथ धोने की आदत संक्रमण तथा अनेक बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भोजन से पहले, शौचालय के उपयोग के बाद और खांसने या छींकने के बाद हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। विद्यालयों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ जल, साबुन तथा हाथ धोने की समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। बच्चों में बचपन से ही स्वच्छता की आदत विकसित करके स्वस्थ समाज की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
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