नई दिल्ली/रांची , जून 29 -- झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखा।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, अनुप्रिया पटेल, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री उपस्थित थे। बैठक में अपनी बात रखते हुए डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनन गतिविधियों के दुष्प्रभाव के कारण यहां फाइलेरिया, मलेरिया, कालाजार, एनीमिया, थैलेसीमिया, टीबी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार पूरी निष्ठा से काम कर रही है, लेकिन केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता और योजनागत सहयोग पर्याप्त नहीं है।

डॉ. अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत झारखंड को मिलने वाली राशि अपेक्षित स्तर पर नहीं मिल रही है, जबकि लगभग चार करोड़ आबादी वाले राज्य को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है।

डॉ. अंसारी ने परिषद के समक्ष जोरदार मांग रखते हुए कहा कि झारखंड में केवल एक एम्स देवघर में है, जो राजधानी रांची से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इस कारण गंभीर मरीजों को समय पर सुपर स्पेशियलिटी इलाज नहीं मिल पाता और कई बार जान बचाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि रांची में हर हाल में एम्स की स्थापना की जाए, ताकि झारखंड की जनता को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं अपने राज्य में ही उपलब्ध हो सकें।

डॉ. अंसारी ने बताया कि झारखंड सरकार लगभग Rs.4100 करोड़ की लागत से रिम्स-2 की स्थापना की दिशा में कार्य कर रही है तथा इसके लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से ऋण लिया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यदि Rs.2000 करोड़ का सहयोग मिल जाए तो यह महत्वाकांक्षी परियोजना शीघ्र पूरी होगी और झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी।

डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड आज भी मेडिकल कॉलेजों की संख्या के मामले में कई राज्यों से पीछे है। उन्होंने चतरा, गढ़वा, गोड्डा, गुमला, पाकुड़, रामगढ़, सिमडेगा और साहिबगंज सहित अन्य जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे डॉक्टरों की कमी दूर होगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी।

डॉ अंसारी ने झारखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों को 100 से बढ़ाकर 200 तथा PG सीटों को बढ़ाकर 250 करने की मांग रखते हुए कहा कि इससे राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी दूर होगी। डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है तथा भूमि संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार शीघ्र इसकी स्वीकृति प्रदान करेगी।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आशा बहनों के वेतन भुगतान में सहयोग दिया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, इसलिए 'ममता वाहन' (छोटी एंबुलेंस) उपलब्ध कराई जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। उन्होंने झारखंड में शिशु मृत्यु दर पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य के सभी सदर अस्पतालों में आईसीयू, सीसीयू एवं एचडीयू स्थापित करने की मांग की।

डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार से कैंसर उपचार के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता और अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को देश की सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में शामिल करना चाहती है।

मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा "झारखंड को उसका अधिकार मिलना चाहिए। हम राजनीति नहीं, जनता की जिंदगी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। रांची में एम्स, बेहतर मेडिकल कॉलेज, आधुनिक अस्पताल और पर्याप्त संसाधन झारखंड की जरूरत हैं, कोई विलासिता नहीं। मैं डॉक्टर भी हूं और स्वास्थ्य मंत्री भी, इसलिए झारखंड की जनता का दर्द समझता हूं। हर मंच पर राज्य के अधिकारों की आवाज़ मजबूती से उठाता रहूंगा और केंद्र से झारखंड के लिए उसका पूरा हक लेकर रहूंगा।"बैठक अत्यंत सकारात्मक रही। डॉ. इरफान अंसारी ने झारखंड के स्वास्थ्य हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए रांची में एम्स की आवश्यकता पर केंद्र सरकार का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार झारखंड की इन जनहितकारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का लक्ष्य राज्य के हर नागरिक तक आधुनिक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है तथा इसके लिए हर स्तर पर निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

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