चेन्नई , अगस्त 21 -- विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक पहुंच का ज़िक्र करते हुए सुलभ, किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ नवाचार के लिए सामूहिक प्रयास की वकालत की है।

डॉ सिंह ने शुक्रवार को यहां आयोजित ब्रिक्स विज्ञान , प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसआईटी) मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने 2026 में अपनी बिक्स अध्यक्षता के लिए "लचीलेपन, नवाचार , सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" को थीम के तौर पर चुना है। यह थीम इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि विज्ञान, तकनीक और नवाचार को लचीलापन बढ़ाकर, समावेशी विकास को बढ़ावा देकर, टिकाऊ विकास को प्रोत्साहित करके और देशों के बीच समान साझेदारी को बढ़ावा देकर मानवता की सेवा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह देखते हुए कि दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता , क्वांटम तकनीक, उन्नत सामग्री , जैव प्रौद्योगिकी, फोटोनिक्स, जियोस्पेशियल तकनीक और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों से तेज़ी से बदल रही है। जहां ये तकनीकें प्रगति के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही हैं, वहीं ये मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी मांग करती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नवाचार सुलभ, किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ बना रहे। उन्होंने कहा कि बिक्स अपनी विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभा और बढ़ती शोध क्षमताओं के साथ, एक सहयोगी, ज़िम्मेदार और भविष्य-उन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अच्छी स्थिति में है।

डॉ. सिंह ने बातचीत को जारी रखने और इसे व्यावहारिक सहयोग और ठोस नतीजों में बदलने में एसटीआई संचालन समिति, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न एसटीआई कार्य समूह के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स एसटीआई सहयोग एक मज़बूत मंच के रूप में विकसित हुआ है जिसमें शोध सहयोग, नवाचार साझेदारी, युवा वैज्ञानिकों का आदान-प्रदान, शोध इंफ्रास्ट्रक्चर और विषय-आधारित कार्य समूह शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान, उभरते वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों और समाजों की विकास संबंधी आकांक्षाओं के साथ सहयोग को संरेखित करने के लिए ब्रिक्स एसटीआई प्राथमिकताओं की व्यापक समीक्षा की जा रही थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत विज्ञान और नवाचार के प्रति एक खुले, समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत की उन पहलों का ज़िक्र किया जिनमें नेशनल क्वांटम मिशन, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन, बीआईओई3 पॉलिसी, नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी और तेज़ी से बढ़ते डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना शामिल हैं। ये पहलें एक ऐसे नज़रिए को दिखाती हैं जिसमें नवाचार से लोगों की ज़िंदगी बेहतर होती है, समाज की मज़बूती बढ़ती है और टिकाऊ आर्थिक बदलाव को बढ़ावा मिलता है।

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