अमृतसर , अगस्त 21 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता एवं सिख चिंतक प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की जीवनी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री 'फ्रॉम सतौज टू पार्लियामेंट' को 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सरकारी संसाधनों से तैयार किया गया राजनीतिक प्रचार करार दिया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता को प्रचार फिल्म नहीं, बल्कि सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड चाहिए।
प्रो. ख्याला ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री का साधारण पृष्ठभूमि से आना निश्चित रूप से गर्व की बात हो सकती है, लेकिन केवल भावनात्मक कहानी के आधार पर सरकार के प्रदर्शन का आकलन नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री को 'मिट्टी से जुड़ा इंसान' दिखाने से बेरोजगार युवाओं, किसानों की समस्याओं और कर्ज में डूबे पंजाब की वास्तविक स्थिति कैसे बदल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब नशे, गैंगस्टरवाद, फिरौती, लूट और कानून-व्यवस्था के संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जबकि सरकार अपनी छवि चमकाने के लिए महंगी डॉक्यूमेंट्री और विज्ञापनों पर ध्यान दे रही है। उन्होंने पूछा कि यदि डॉक्यूमेंट्री पंजाब की वास्तविक कहानी पेश करती है तो इसमें रोजगार की मांग कर रहे युवाओं, किसानों और मजदूरों पर कथित लाठीचार्ज तथा कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए एवं अन्य बकाया राशि का मुद्दा क्यों नहीं दिखाया गया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि साढ़े चार साल बाद भी पंजाब के पास स्पष्ट कृषि, उद्योग, खनन और खेल नीति नहीं है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को रोजगार की तलाश में राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है और निवेश भी दूसरे राज्यों की ओर जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि ऐसे में विकास की कहानी कहां लिखी जा रही है।
बेअदबी के मामलों का जिक्र करते हुए प्रो. ख्याला ने कहा कि सरकार ने न्याय दिलाने के बड़े-बड़े वादे किए थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज पीड़ित परिवारों को लगता है कि उन्हें पूरा न्याय मिला है और क्या डॉक्यूमेंट्री में उनके सवालों का कोई जवाब दिया गया है। उन्होंने नशे के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ करोड़ों रुपये प्रचार पर खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद युवाओं की नशे से होने वाली मौतों का सिलसिला चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि विज्ञापनों से नशा खत्म हुआ है या केवल सरकार की छवि बनाने का प्रयास किया गया है।
प्रो ख्याला ने सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई के माहौल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा पंजाब पुलिस और सरकार की कार्यप्रणाली पर की जाने वाली टिप्पणियां भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पंजाब के प्रमुख मुद्दों पर खुली सार्वजनिक बहस कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता किसी डॉक्यूमेंट्री की पटकथा के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार के वास्तविक कामकाज के आधार पर फैसला करेगी।
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