रायबरेली , जुलाई 16 -- उत्तर प्रदेश के रायबरेली में 10 वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में गिरफ्तार नर्सिंग होम संचालक डॉ. अमित सिंह के समर्थन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को जिले के निजी चिकित्सकों ने चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार कर गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया। इस बीच न्यायालय ने डॉ. अमित सिंह की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी।

आईएमए के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। आईएमए के पूर्व पदाधिकारी डॉ. संजय रस्तोगी, अध्यक्ष डॉ. संजीव जायसवाल और सचिव डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि संगठन कानून का सम्मान करता है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार उपचार के दौरान हुई प्रत्येक प्रतिकूल घटना या मरीज की मृत्यु को स्वतः आपराधिक लापरवाही नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि यदि किसी चिकित्सक ने सद्भावना में उपचार किया हो और चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण मरीज को क्षति या मृत्यु हुई हो, तो किसी सक्षम एवं स्वतंत्र चिकित्सकीय विशेषज्ञ की प्रतिकूल राय के बिना गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए। आईएमए का आरोप है कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

विरोध स्वरूप चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया तथा आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर नियमित चिकित्सीय कार्य से विरत रहे।

उल्लेखनीय है कि नगर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची का टॉन्सिल के उपचार के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ गया था। बाद में उसे लखनऊ के एक अस्पताल रेफर किया गया, जहां छह जुलाई को उसकी मृत्यु हो गई। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने डॉ. अमित सिंह, डॉ. निशांत सिंह तथा अन्य स्टाफ के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। पुलिस ने बुधवार को डॉ. अमित सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था।

गुरुवार को जमानत अर्जी खारिज होने के बाद चिकित्सकों में और अधिक नाराजगी देखने को मिली। आईएमए ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इससे जिले में चिकित्सकों और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ने की संभावना है।

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