चम्पावत , जून 22 -- उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डॉक्टरों के परामर्श पत्र पर नाम, योग्यता और पंजीकरण नंबर की मुहर लगाना अनिवार्य कर दिया है।
महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखण्ड द्वारा जारी निर्देशों के तहत अब प्रदेश के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, नर्सिंग होम और चैरिटेबल अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए प्रत्येक चिकित्सकीय परामर्श पत्र (प्रिस्क्रिप्शन) पर नाम, शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल काउंसिल पंजीकरण संख्या युक्त मुहर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) तथा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जा रही है। अब चिकित्सकों को ओपीडी पर्चों, डिस्चार्ज समरी, रेफरल लेटर तथा अन्य चिकित्सकीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के साथ स्पष्ट और पठनीय मुहर लगानी होगी, जिसमें उनका पूरा नाम, मान्य शैक्षणिक योग्यता (एमबीबीएस, एमडी आदि) तथा उत्तराखण्ड या भारतीय चिकित्सा परिषद की पंजीकरण संख्या अंकित होगी।
स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में यह मामला आया था कि कई निजी क्लीनिकों और स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की जा रही थी, जिससे योग्य और पंजीकृत चिकित्सकों तथा अपंजीकृत व्यक्तियों के बीच अंतर करना कठिन हो रहा था। इसी को देखते हुए विभाग ने इस व्यवस्था को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया है।
आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को अपने-अपने जनपदों में नियमित और औचक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी चिकित्सक निर्धारित मानकों के अनुरूप मुहर का उपयोग कर रहे हैं या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध मुहर और पंजीकरण संख्या के जारी किए गए परामर्श पत्र नियमों का उल्लंघन माने जाएंगे। ऐसे मामलों में संबंधित चिकित्सालय या क्लीनिक के खिलाफ क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और चिकित्सा परिषद के नियमों के तहत पंजीकरण निलंबन सहित कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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