पटना , अप्रैल 29 -- पशुओं के स्वास्थ्य पर पॉलिथीन के दुष्प्रभावों को लेकर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं।

आम लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से जारी सुझाव में कहा गया है कि पॉलिथीन पशुओं के लिए साइलेंट किलर की तरह काम करता है, इसलिए हमें अपने चारों तरफ पोलिथीन मुक्त समाज बनाने की आवश्यकता है।

विभाग का सुझाव है कि खाद्य पदार्थों, हरी सब्जियों के छिलके आदि को पोलिथीन में बंद कर सड़क किनारे, रेल पटरी के किनारे या खेत-खलिहान, नदी-तालाब में या उनके किनारे नहीं फेंकना चाहिए। पॉलिथीन चिकना एवं स्वादरहित होता है, जिस कारण पशु आसानी से अन्य खाद्य सामग्रियों के साथ इसे भी निगल लेते हैं, जिससे पशुओं की जान तक जा सकती है।

पॉलिथीन पशुओं के पेट या आंतों में जाकर धीरे-धीरे जमा हो जाता है एवं कड़ा गेंद या रस्सी का रूप ले लेता है। परिणामस्वरूप पशुओं को पाचन संबंधी समस्याएं जैसे भूख न लगना, दस्त, गैस (अफरा) एवं पेट दर्द की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं और अंत में यह पशुओं के लिए साइलेंट किलर के रूप में कार्य करता है।

अन्य बीमारियों की तरह इसका कोई दवा, सूई, गोली या चूर्ण आदि से उपचार नहीं किया जा सकता है। पॉलिथीन एवं इसके साथ अन्य सामग्रियों को ऑपरेशन के जरिए पेट से निकालना ही इसका एकमात्र इलाज होता है। इस तरह के गंभीर दुष्प्रभावों से पशुओं को बचाने के लिए पोलिथीन के कैरी बैग एवं लिफाफों पर कानूनी रूप से लगाए गए प्रतिबंध का पालन किया जाना चाहिए।

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