जगदलपुर , मई 23 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के आदिवासी प्रतिनिधि धर्मांतरण के बाद भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभ मिलने के विरोध में डी-लिस्टिंग की मांग को लेकर कल राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेंगे।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को वर्तमान में भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत आरक्षण और अन्य शासकीय सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे मूल आदिवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, जो लोग अपनी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाज और मान्यताओं को छोड़कर अन्य धर्म अपना चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग की सूची से बाहर किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर डी-लिस्टिंग अभियान चलाया जा रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित