नयी दिल्ली , मार्च 27 -- नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमान सेवा कंपनियों के लिए केंद्र सरकार और राज्यों के विशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) को ले जाते समय उनकी सुरक्षा के मद्देनजर नया निर्देश जारी किया है।
डीजीसीए के शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया है कि वीआईपी के लिए विमान सेवा प्रदान करने वाली कंपनी यह सुनिश्चित करेगी कि चालक दल के सदस्यों पर सुरक्षा से समझौता करते हुए उड़ान के परिचालन के लिए कोई दबाव नहीं है। साथ ही वीआईपी सीधे चालक दल के सदस्यों से बात कर अंतिम समय में फ्लाइट प्लान बदलाव नहीं करा सकेंगे, ऐसे बदलाव सीधे कंपनी के प्रबंधन से स्वीकृत होने चाहिये।
वीआईपी को ले जाने वाले विमान अनिवार्य रूप से दो इंजन वाले होने चाहिये और कम से कम दो पायलट होने चाहिये। विमान की परिचालन दक्षता अच्छी होनी चाहिये।
ऐसी उड़ानों का परिचालन करने वाले निजी ऑपरेटर या राज्य सरकारों के नागरिक उड्डयन विभाग वीआईपी या चुनावी उड़ानों के दौरान वीआईपी को नियमित रूप से ब्रीफिंग प्रदान करेंगे और विमान में उन्हें एक पैम्फ्लेट रखना होगा जिसमें विमान की क्षमता और सीमाओं की जानकारी होगी।
डीजीसीए के आदेश में लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति, केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्यों के राज्यपाल, राज्यों के मुख्य मंत्रियों, राज्यों के कैबिनेट स्तर के मंत्रियों और एसपीजी की जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त सभी लोगों को वीआईपी की सूची में शामिल किया गया है।
महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राज्य से बारामती में एक विमान हादसे में हुई मौत के ठीक दो महीने बाद यह आदेश जारी किया गया है। आरोप लगे थे कि उनके फ्लाइट प्लान में आखिरी समय में बदलाव किया गया था। जांच में यह भी पता चला है कि कम दृश्यता के बावजूद विमान को बारामती हवाई पट्टी पर उतारने की कोशिश की गयी और इस दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गयी।
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