रांची , जून 16 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार को लेकर हेमंत सरकार पर बड़ा निशाना साधा है।

श्री मरांडी ने कहा कि पहले डीजीपी अनुराग गुप्ता, अब महाधिवक्ता राजीव रंजन! एक ने सत्ता के संरक्षण में पनप रहे भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का काम किया, तो दूसरे ने सरकार के हर सही-गलत फैसले को कानूनी वैधता का जामा पहनाने की कोशिश की। संवैधानिक पदों पर बैठे इन अधिकारियों की जवाबदेही झारखंड की जनता और संविधान के प्रति होनी चाहिए थी, लेकिन व्यवहार ऐसा रहा मानो उनकी निष्ठा सिर्फ हेमंत सोरेन और सत्ता बचाने तक सीमित हो।

श्री मरांडी ने कहा कि अवैध खनन, शराब घोटाला, जमीन घोटाला, रंगदारी, ट्रांसफर-पोस्टिंग में उगाही...इन सबने झारखंड को खोखला करने का काम किया। विडंबना देखिए, जनता की गाढ़ी कमाई से करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर इन्हीं घोटालों पर लीपापोती की गई और मुख्यमंत्री को पाक-साफ साबित करने की कवायद चलती रही। डीजीपी और महाधिवक्ता जैसे पदों पर बैठे लोग अगर सत्ता के "सारथी" बन जाएं, तो लोकतंत्र कमजोर और भ्रष्टाचार बेलगाम हो जाता है।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता की चाटुकारिता में डूबे अधिकारियों को अब भी चेत जाना चाहिए। सरकारें बदलती हैं, कुर्सियां बदलती हैं, लेकिन जनता सब देखती और याद रखती है। संविधान किसी दल या व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं है। पद अस्थायी है, लेकिन जवाबदेही, जनविश्वास और इतिहास का फैसला स्थायी होता है।

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