चंडीगढ़ , अक्टूबर 06 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए/डीआर) के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए लंबित डीए/डीआर का भुगतान करने की मांग की।
श्री चुघ ने कहा कि तीन अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल की अपीलें खारिज करते हुए लंबित डीए/डीआर किस्तों का भुगतान दो सप्ताह में करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने केंद्र सरकार की दरों के अनुरूप पंजाब में कार्यरत आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के डीए/डीआर तथा देरी की स्थिति में छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भी उल्लेख किया था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने की बात कही, लेकिन याचिका एक महीने से अधिक समय तक प्रक्रियागत खामियों के कारण लंबित रही। उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए समय हासिल करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई। उन्होंने दावा किया कि छह अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री की रिपोर्ट में राज्य सरकार और पीएसपीसीएल की याचिकाओं में खामियां दूर नहीं किए जाने की बात सामने आई। उन्होंने कहा कि इसके बाद उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मुख्य सचिव द्वारा तथ्यों के गलत प्रस्तुतीकरण के आरोप पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने को लेकर नोटिस जारी किया।
श्री चुघ ने कहा कि डीए/डीआर कर्मचारियों और पेंशनरों का अधिकार है और सरकार को कानूनी प्रक्रिया के बजाय अदालत के आदेशों का पालन करते हुए उनका लंबित भुगतान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को कर्मचारियों और पेंशनरों के पक्ष में उठाती रहेगी।
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