खरगोन , जून 24 -- मध्यप्रदेश के खरगोन स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 13 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

विशेष पॉक्सो न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कैलाश प्रसाद मरकाम ने आरोपी सतीश सागोरे को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। न्यायालय ने अपना निर्णय वैज्ञानिक साक्ष्यों और डीएनए जांच रिपोर्ट के आधार पर दिया, जबकि सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पूर्व बयानों से मुकर गई थी।

अभियोजन के अनुसार 23 मार्च 2022 को पीड़िता के पिता ने खरगोन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपनी पुत्री और अन्य छात्राओं को कक्षा 11वीं की परीक्षा दिलाने स्कूल छोड़कर लौटे थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद जानकारी मिली कि आरोपी सतीश सागोरे उनकी नाबालिग पुत्री को मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गया है।

शिकायत के अनुसार आरोपी पूर्व से ही बालिका को बहलाने-फुसलाने का प्रयास करता था। परिजनों द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने बालिका का पीछा करना जारी रखा। काफी तलाश के बाद भी बालिका का पता नहीं चलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

विवेचना के दौरान पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया, लेकिन डीएनए जांच रिपोर्ट आरोपी के खिलाफ सकारात्मक पाई गई। न्यायालय ने इसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 13 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित