दरभंगा , अक्टूबर 07 -- लित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मैथिली शोध को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। शोधार्थियों को शोध में मौलिकता, प्रमाणिकता और अकादमिक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।प्रो. मेहता ने बुधवार को विभाग में आयोजित 'शोधार्थी प्रबोधन' कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि शोधार्थी किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान एवं शोध-परंपरा के महत्वपूर्ण वाहक होते हैं,इसलिए उन्हें अपने शोधकार्य के प्रति पूरी निष्ठा, गंभीरता और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने शोधार्थियों से अपने विषय की गहरी समझ विकसित करने, प्रमाणिक स्रोतों का अध्ययन करने तथा नई एवं मौलिक स्थापनाएं प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा ने शोधकार्य में उपयोगी डिजिटल संसाधनों की जानकारी देते हुए शोधगंगा, शोध गंगोत्री, शोधचक्र, शोधशुद्धि, ई-शोधसिंधु, ओएनओएस, विद्वान एवं आईआरआईएनएस जैसे मंचों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकी संसाधनों ने शोध की प्रक्रिया को व्यापक, सरल और प्रभावी बनाया है।उन्होंने शोधार्थियों को पूर्व में किए गए शोध, शोध-प्रबंध, शोध-साहित्य एवं अकादमिक सामग्री के अध्ययन के लिए इन डिजिटल मंचों का उपयोग करने की सलाह दी। साथ ही साहित्यिक चोरी से बचने तथा दूसरे विद्वानों के विचारों एवं सामग्री का प्रयोग करते समय उचित संदर्भ और उद्धरण देने पर जोर दिया।

विभाग की वरीय सहायक प्राध्यापिका डॉ. अभिलाषा कुमारी ने 'शोध-प्रक्रिया' विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शोध की वास्तविक शुरुआत जिज्ञासा से होती है। उन्होंने विषय चयन, उपलब्ध साहित्य के संग्रह एवं अध्ययन, सामग्री के विश्लेषण तथा व्यवस्थित शोध-पद्धति के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने शोध में नवीनता, प्रासंगिकता, तार्किकता और तथ्यपरकता को आवश्यक बताया।

कार्यक्रम का संचालन वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ. सुरेश पासवान ने किया। इस दौरान शोधार्थियों ने विषय चयन, शोध-सामग्री, डिजिटल संसाधनों, शोध की गुणवत्ता एवं साहित्यिक चोरी सहित विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने समाधान किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनीता कुमारी ने किया।

कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक एवं शोधार्थियों के अलावा बड़ी संख्या में छात्र भी उपस्थित थे।

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