जयपुर , जुलाई 02 -- डिजिटल प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बेहतर उपयोग से विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का मार्ग आसान हुआ है।
जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दूसरे दिन 'डिजिटल इंटरवेंशन टू एन्हांस एक्सेस एंड क्वालिटी ऑफ स्कूल एजूकेशन' विषय पर आयोजित सत्र में देशभर के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समावेशी बनाने के प्रयासों पर अपने अनुभव साझा करने के दौरान यह बात कही।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के आयुक्त विकास गुप्ता ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन के 'समागम' डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें विद्यार्थी, शिक्षक, विद्यालय प्रबंधन, वित्त, आधारभूत संरचना और प्रशासन से जुड़ी सभी सेवाओं को एक मंच पर जोड़ा गया है। एआई आधारित प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रगति, विद्यालयों के प्रदर्शन और आधारभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी की जा रही है, जिससे समय पर बेहतर निर्णय लिए जा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी देबब्रत नायक ने अपार आईडी, डिजी लॉकर और डिजिटल शैक्षणिक अभिलेखों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल पहचान से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों को सुरक्षित रखने और देश में कहीं भी आसानी से उपयोग करने की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में सुरक्षित डिजिटल रेकार्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे और इससे प्रवेश, उच्च शिक्षा तथा रोजगार से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल और पारदर्शी बनेंगी।
गुजरात के राज्य परियोजना निदेशक रंजीतकुमार जे. ने जी-शाला डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी देते हुए बताया कि यह विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक समग्र शिक्षण मंच है। इस प्लेटफॉर्म पर ई-पुस्तकें, वीडियो, अभ्यास सामग्री, प्रश्न बैंक, इंटरैक्टिव गतिविधियां तथा शिक्षकों के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं। इनका डेटा एनालिसिस कर विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का लगातार आकलन किया जा रहा है जिससे उनकी जरूरत के अनुसार शिक्षण को और बेहतर बनाया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने विद्या समीक्षा केंद्र के अनुभव साझा करते हुए बताया कि डिजिटल डैशबोर्ड और नियमित मूल्यांकन की मदद से विद्यार्थियों की सीखने में आने वाली दिक्कत/ कमियों की समय पर पहचान की जा रही है। इसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं जिससे विद्यार्थियों के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि डेटा आधारित निर्णय शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
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