टिहरी , जुलाई 27 -- उत्तराखंड में टिहरी गढवाल पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर 4.35 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर साइबर अपराधी को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है।
साइबर सेल टिहरी और थाना मुनिकीरेती की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की जिसका सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने खुलासा किया है।
पुलिस के अनुसार, ढालवाला निवासी एक व्यक्ति ने थाना मुनिकीरेती में शिकायत दर्ज कराई थी कि जनवरी 2026 में उसे व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि शिकायतकर्ता के नाम से मुंबई स्थित एक बैंक में खाता खोलकर उसका इस्तेमाल धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है।
आरोपियों ने वीडियो कॉल के दौरान फर्जी पुलिस थाना, वर्दीधारी अधिकारी और कार्यालय का दृश्य दिखाकर शिकायतकर्ता का विश्वास जीत लिया। इसके बाद गिरफ्तारी, कानूनी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा का भय दिखाकर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। डर के कारण शिकायतकर्ता ने आरोपियों के बताए बैंक खाते में 4.35 लाख रुपये चेक के माध्यम से जमा करा दिए।
मामले में थाना मुनिकीरेती में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विवेचना साइबर सेल को सौंपी गई। जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप कॉल, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त कर संयुक्त पुलिस टीम महाराष्ट्र भेजी गई।
तकनीकी सर्विलांस और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 23 जुलाई को महाराष्ट्र के सतारा जिले के ग्राम कोले निवासी अंकुश राजेन्द्र गाडगे को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी की ऑनलाइन ट्रेडिंग करता था तथा साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न म्यूल खातों से यूएसडीटी में परिवर्तित कर अन्य वॉलेट और खातों में स्थानांतरित करता था। इसके एवज में उसे कमीशन मिलता था।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी की गई है। पुलिस पूरे साइबर नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
टिहरी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर "डिजिटल अरेस्ट" का भय दिखाए, धनराशि ट्रांसफर करने का दबाव बनाए या गोपनीय जानकारी मांगे, तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं। किसी भी स्थिति में धनराशि ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
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