नासिक , अप्रैल 17 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 'नासिक डायोसेसन काउंसिल ट्रस्ट' के स्वामित्व वाली संपत्तियों की खरीद-बिक्री में बाधा डालने के लिए नासिक शहर पुलिस और पंजीकरण विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि पुलिस के पास किसी भी आम नागरिक से अधिक अधिकार नहीं हैं और इस मामले में पुलिस का हस्तक्षेप "शक्ति का दुरुपयोग" है।
न्यायमूर्ति एन. जे. जमादार की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने सरकार को यह छूट भी दी है कि वह इस राशि की वसूली संबंधित दोषी अधिकारियों से कर सकती है।
यह विवाद नासिक के शरणपुर गांवठान क्षेत्र की भूमि से जुड़ा है, जिसका मूल मालिक नासिक डायोसेसन काउंसिल ट्रस्ट है। साल 2001 में चैरिटी कमिश्नर की अनुमति से इस जमीन के कुछ हिस्से 'ठक्कर डेवलपर्स' (नवरत्न लैंड्स एंड एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड) को बेचे गए थे। चूंकि इस जमीन पर पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और दंगा नियंत्रण पुलिस के कार्यालय स्थित थे, इसलिए पुलिस विभाग ने इस सौदे का विरोध किया।
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