नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- मानसून के आगमन के साथ ही डायरिया और अन्य जलजनित रोगों के खतरे से निपटने में केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन सहायक हो रहा है।
जल जीवन मिशन के एक नोट के अनुसार छोटे बच्चों और उनके परिवारों के लिए समय पर सुरक्षित पेयजल, उचित स्वच्छता और शीघ्र उपचार उपलब्ध होना बीमारी और स्वस्थ जीवन की शुरुआत के बीच महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकता है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के सात प्रमुख मंत्रालयों और विभागों ने 'स्वच्छ जल, समुचित उपचार - डायरिया से बचें हर बार' थीम के अंतर्गत स्टॉप डायरिया (डायरिया की रोक-थाम) अभियान-2026 का संयुक्त रूप से संचालन शुरू किया है।
गत 16 जून से आगामी 31 जुलाई तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य समन्वित प्रयासों के माध्यम से विशेषकर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में कम आयु के बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए डायरिया की रोकथाम और नियंत्रण करना है। छोटे बच्चों में डायरिया के बार-बार होने वाले संक्रमण से बाल मृत्यु दर, कुपोषण, शारीरिक विकास में बाधा तथा मानसिक एवं बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जल जीवन मिशन के इस नोट में कहा गया है कि मिशन का हालांकि ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और जिंक के माध्यम से समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इन बीमारियों की रोकथाम सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतों और जागरूक समुदायों से ही शुरू होती है। डायरिया का उपचार केवल चिकित्सकीय विषय नहीं है, बल्कि यह जल की गुणवत्ता, स्वच्छता, साफ-सफाई और सामुदायिक व्यवहार से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस अभियान की 'प्रोटेक्ट, प्रिवेंट एंड ट्रीट (पीपीटी)' रणनीति के तहत रोकथाम और समय पर उपचार दोनों पर समान रूप से बल दिया गया है। इसका संदेश स्पष्ट है कि सुरक्षित पेयजल डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। यह दृष्टिकोण जल जीवन मिशन की उस महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है, जिसके माध्यम से ग्रामीण भारत में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ाकर जलजनित रोगों के जोखिम को कम किया जा रहा है। 'जल जीवन मिशन- हर घर जल' कार्यक्रम के अंतर्गत आज देश भर में फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक घर-घर सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। इससे दूषित जल स्रोतों पर निर्भरता कम हुई है और स्वस्थ समुदायों के निर्माण की मजबूत नींव रखी गयी है।
नोट में कहा गया है कि केवल पाइप से जल उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। मानसून के दौरान भारी वर्षा, स्थानीय बाढ़ और जल प्रदूषण की आशंका को देखते हुए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जल स्रोत से लेकर नल तक पेयजल पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसी उद्देश्य से स्टॉप डायरिया अभियान, जल जीवन मिशन की उपलब्धियों को और मजबूत करते हुए जल गुणवत्ता की सघन निगरानी, अनिवार्य क्लोरीनीकरण तथा जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से जलजनित रोगों के जोखिम को कम करने का कार्य कर रहा है। अभियान के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गांवों, विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में व्यापक स्तर पर पेयजल गुणवत्ता की निगरानी ,जलापूर्ति प्रणालियों का नियमित क्लोरीनीकरण और वितरण बिंदुओं पर न्यूनतम 0.2 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) मुक्त अवशिष्ट क्लोरीन का स्तर बनाये रखने की व्यवस्था की गयी है। साथ ही, ओवरहेड टैंकों और अन्य जल भंडारण संरचनाओं की सफाई एवं कीटाणुशोधन किया जा रहा है।
इस अभियान में ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गयी है। गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित जल भंडारण, साबुन से हाथ धोने, स्वच्छता बनाये रखने तथा जल गुणवत्ता से संबंधित किसी भी समस्या की समय पर सूचना देने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
जल जीवन मिशन की ओर से इस अभियान में संदेश दिया जा रहा है कि जलापूर्ति अवसंरचना तभी अधिक प्रभावी साबित होती है, जब उसके साथ व्यवहार परिवर्तन भी जुड़ा हो। अभियान के अंतर्गत विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों को भी जल सुरक्षा अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया गया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित