वाशिंगटन , अप्रैल 01 -- अंतरराष्ट्रीय आर्थिक थिंक टैंक पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (पाई) के विशेषज्ञ एलन वुल्फ का कहना है कि हाल ही कैमरुन के याउंडे में संपन्न हुआ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी14) कई प्रमुख लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है।
संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में श्री वुल्फ ने कहा कि सम्मेलन का समापन बिना किसी समग्र मंत्रिस्तरीय घोषणा के हुआ। ई-कॉमर्स पर शुल्क लगाने की रोक (मोरटोरियम) को बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर भी कोई सहमति नहीं बन पाई। इसके अलावा, विकास के लिए निवेश सुविधा समझौते (आईएफडीए) को अपनाने और डब्ल्यूटीओ सुधारों के लिए कार्यक्रम पर भी सदस्य देश एकमत नहीं हो सके।
इन विफलताओं के बावजूद, कैमरून के याउंडे में हुए इस सम्मेलन से वैश्विक व्यापार प्रणाली के लिए एक सकारात्मक खबर भी आई है। वैश्विक व्यापार के लगभग 70 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाले 66 डब्ल्यूटीओ सदस्यों के गठबंधन ने एक नए इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स समझौते के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। हालांकि भारत और अन्य देशों के विरोध के कारण यह अभी आधिकारिक तौर पर डब्ल्यूटीओ की नियम पुस्तिका का हिस्सा नहीं है।
इस बहुपक्षीय समझौते का नेतृत्व ऑस्ट्रेलिया, जापान और सिंगापुर ने किया है, जबकि भारत, दक्षिण अफ्रीका जैसे देश इसका विरोध कर रहे हैं। भारत ऐसे किसी भी समझौते के पक्ष में नहीं है, जिसे सभी सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति प्राप्त न हो।
दरअसल, 1998 तक डिजिटल लेन-देन (जैसे ई-बुक, सॉफ्टवेयर डाउनलोड, या नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन) पर सीमा शुल्क नहीं लगता था। इस पर लगी रोक 26 मार्च को समाप्त हो गई। लेकिन भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के विरोध के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब देश सैद्धांतिक रूप से इन पर टैक्स लगा सकते हैं।
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