बेंगलुरु , फरवरी 10 -- कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ (केएससीए) ने लंबित बकाया बिलों की तत्काल मंजूरी की मांग को लेकर यहां 'फ्रीडम पार्क' में गुरुवार को विशाल विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। राज्य सरकार पर बार-बार अनुरोधों को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए संघ यह विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहा है।
संघ ने बयान में कहा है कि कर्नाटक सरकार के पास पिछले चार वर्षों में विभिन्न विभागों से किये गये कार्यों के लिए करीब 37,000 करोड़ रुपये का बकाया हैं, जो वित्तीय अवधि 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 को कवर करते हैं।
केएससीए ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के लिए उसने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्रियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से कई बार मुलाकात की है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है। उसने आरोप लगाया कि पिछले दो से ढाई वर्षों से मुख्यमंत्री की संघ के पदाधिकारियों के साथ कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई है, हालांकि कई बैठकें तय की गयी और बाद में बिना स्पष्टीकरण के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयीं।
संघ ने यह भी कहा कि सार्वजनिक निर्माण मंत्री और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार से हस्तक्षेप की मांग करने के उनके प्रयासों का कोई परिणाम नहीं निकला, जबकि ठेकेदारों की शिकायतों के समाधान के लिए बैठकें बुलाने के बार-बार आश्वासन दिये गये थे।
पूर्व की कोशिशों पर बात करते हुए केएससीए ने कहा कि उसने सभी लंबित बिलों का तत्काल भुगतान, ठेकेदारों के बीच वरिष्ठता बनाये रखने और प्राथमिकता के आधार पर एक ही किस्त में धनराशि देने की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी गयी थी कि यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो राज्यभर में चल रहे कार्य बंद कर दिये जायेंगे। इसके बाद 2026-27 के बजट में बजटीय प्रावधान की मांग करते हुए लिखित प्रतिवेदन भी दिये गये, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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