रांची , अक्टूबर 13 -- झारखंड के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी), रांची में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत के मामले में शिक्षा मंत्रालय ने उच्चस्तरीय जांच की पहल की है।

मामले की परिस्थितियों और संस्थान की व्यवस्थाओं की पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। समिति घटना के कारणों की समीक्षा करने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुधारात्मक सुझाव दे सकती है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, समिति की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी करेंगी। समिति में एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक और शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, समिति के गठन और उसके कार्यक्षेत्र से संबंधित आधिकारिक आदेश की पुष्टि होना अभी बाकी है।

ज्ञातव्य है कि खेलगांव परिसर स्थित ट्रिपल आईटी के छात्रावास में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत के बाद संस्थान में विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान छात्रों ने हॉस्टल की सुविधाओं, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और संस्थान के प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए थे।

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने आरोप लगाया था कि आपात स्थिति में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने छात्रावास में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन सहायता और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की थी। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और घटना के दौरान संस्थान की ओर से उठाए गए कदमों का आकलन जांच के बाद ही हो सकेगा।

तीन सदस्यीय समिति घटना से जुड़े तथ्यों, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों की समीक्षा कर सकती है। इसके अलावा, छात्रावास में चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस की उपलब्धता और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सुविधाओं का आकलन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीकी संस्थानों में पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य को लेकर दबाव के बीच छात्रों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।

इस घटना ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच समिति की प्रक्रिया और उसकी सिफारिशों पर नजर रहेगी। यदि संस्थान की व्यवस्थाओं में कोई कमी सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, समिति के आधिकारिक कार्यक्षेत्र और जांच की समयसीमा की पुष्टि होने के बाद ही इसकी जिम्मेदारियों का स्पष्ट विवरण सामने आएगा। छात्र की मौत के कारणों और संभावित जवाबदेही का निर्धारण तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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