वाशिंगटन , अक्टूबर 23 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शीत युद्ध के दौर के रक्षा उत्पादन अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेट्रोलियम के उत्पादन, रिफाइनिंग और उससे जुड़ी गतिविधियों को देश की राष्ट्रीय रक्षा के लिए आवश्यक घोषित किया है।
सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इस कदम से प्रशासन को तेल परियोजनाओं, पाइपलाइनों और ईंधन भंडारण से जुड़ी योजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की अनुमति मिल सकती है। राष्ट्रपति के ज्ञापन में "वित्तपोषण की सीमाएँ, परियोजनाओं को पूरा करने में लगने वाला लंबा समय, अनुमति प्राप्त करने और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी बाधाएँ तथा आपूर्ति श्रृंखला की सीमाएँ" का उल्लेख किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद कच्चे तेल और डीज़ल की कीमतें आसमान छू रही हैं। वहीं, रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों ने ईंधन की आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।
प्रशासन ने रूसी डीज़ल की आपूर्ति का भी सहारा लिया है। अक्टूबर की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौते की घोषणा की थी, जिसके तहत रूस अमेरिका और वैश्विक बाज़ारों में ईंधन की आपूर्ति जारी करेगा।
श्री ट्रंप के अनुसार इस योजना के तहत शुरुआत में तीन लाख टन से अधिक ईंधन, नवंबर में अतिरिक्त पांच लाख टन और उसके बाद 10 लाख टन ईंधन उपलब्ध कराने की योजना थी। इन आपूर्तियों को सुगम बनाने के लिए अमेरिका ने अस्थायी रूप से प्रतिबंधों से जुड़ी कुछ पाबंदियों में भी ढील दी।
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