गोरखपुर , जून 23 -- उत्तर प्रदेश में गोरखपुर महानगर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर इन्जिनियर डाक्टर पीसीएस, आईएएस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में निपुणता प्राप्त कराने के लिये छात्रों के अभिभावकों से लाखों-लाख रुपये की वसूली कर खस्ताहाल स्थानों पर बैठाकर बच्चों को निपुणता की दीक्षा दी जा रही है मगर फायर सुरक्षा सिस्टम लगवाने में ट्यूशन सेंटरों के संचालक कोसों दूर नजर आते हैं।

गोरखपुर महानगर के गोलघर, बैंकरोड, खोवा मण्डी, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर, शाहपुर समेत महानगर के दर्जनों स्थानों पर ट्यूशन सेंटर बिना किसी मानक के संचालित हो रहे हैं। एक या दो कमरों में खचाखच भीड़ के बीच छात्रों को बैठाया जाता है, जहां न तो उचित निकास की व्यवस्था है और न ही अग्निशमन यंत्र मौजूद हैं। इसके बावजूद संचालक मोटी फीस वसूलने में पीछे नहीं हैं।

बीते दिन लखनऊ में हुई घटना ने पूरे प्रदेश में कोहराम मचा दिया, जिसके बाद महानगर के कुछ ट्यूशन सेंटरों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। हालांकि कई स्थानों पर अब भी लापरवाही जारी है। बैंक रोड पर स्थित एक सेंटर ऐसा है जहां बच्चों की भारी भीड़ होने के बावजूद अग्नि सुरक्षा सिस्टम का कोई इंतजाम नहीं है।

यदि देखा जाए तो बैंक रोड, गैस गोदाम गली क्षेत्र सहित महानगर के कई मोहल्लों में ट्यूशन सेंटर फैलते जा रहे हैं। अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों से लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं। जब परिणाम आते हैं तो कई बार अपेक्षित सफलता नहीं मिलती, लेकिन इसके बावजूद अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए इन सेंटरों की ओर रुख करते हैं।

लखनऊ की घटना के बाद जनमानस में डर का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर सख्ती की कमी साफ नजर आ रही है। यदि समय रहते इन ट्यूशन सेंटरों की जांच कर अग्निशमन सुरक्षा उपकरण अनिवार्य नहीं कराए गए, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे ट्यूशन सेंटरों की जांच कर मानक के विपरीत संचालित संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके।

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