नयी दिल्ली , सितंबर 11 -- जापान से भारत में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकारी स्तर पर किये जा रहे प्रयासों के बीच टोक्यो में भारतीय दूतावास और भारतीय आयकर विभाग ने मिल कर निवशकों के लिए कर से जुड़ी सुनिश्चिता पर एक परिचर्चा का आयोजन किया।

यह संगोष्ठी आयकर विभाग के विदेश में काम करने वाले प्रभाग की टोक्यो इकाई के सहयोग से किया गया है।

इसका विषय था, "भारत-जापान: अग्रिम मूल्य-निर्धारण समझौता (एपीए) और परस्पर सहमति से निर्धारित प्रक्रिया (एमएपी) के जरिए टैक्स से जुड़ी निश्चितता"। इसमें भारतीय आयकर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों और परामर्श फर्म डेलॉइट के कर विशेषज्ञों ने भारत-जापान अग्रिम मूल्य सममझौत के सफल अनुभवों और शानदार प्रदर्शन पर चर्चा की।

टोक्यो में भारत की राजदूत नगमा एम. मल्लिक ने कारोबार में आसानी, कर प्रशासन, विनियामकीय पारदर्शिता और निवेश से जुड़ी निश्चितता को बेहतर बनाने के लिए भारत द्वारा किए गए व्यापक सुधारों पर प्रकाश डाला। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से, संयुक्त सचिव (विदेशी कर एवं कर अनुसंधान) श भास्कर गोस्वामी ने भी प्रस्तुति दी और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए।

गौरतलब है कि सरकारी और निजी निवेश के मामले में जापान भारत का एक प्रमुख भागीदार है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान की अपनी हाल की यात्रा में दोनों देशों के बीच 10 वर्षों में (2035 तक) 10 लाख करोड़ येन (लगभग सात लाख करोड़ रुपये) के निवेश का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि इसका लगभग 14-15 प्रतिशत हिस्सा (लगभग एक लाख करोड़ रुपये) शुरुआती 10 महीनों में ही प्राप्त हो चुका है। श्री गोयल को उम्मीद है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि 10 साल का यह लक्ष्य तीन से चार वर्षों के भीतर ही पूरा हो सकता है।

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