नयी दिल्ली , मई 20 -- उच्चतम न्यायालय ने टैट्रा पैक और पाउच जैसे छोटे पैकेटों में शराब की बिक्री को बेहद भ्रामक बताते हुए केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभागों को बुधवार को नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए।
पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर चिंता व्यक्त की है।
याचिका में फलों के जूस जैसे दिखने वाले इन पैकेटों में शराब बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता संगठन 'कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग' की ओर से पेश वकील विपिन नायर ने अपनी याचिका में कहा कि शराब की यह पैकेजिंग सामान्य फलों के जूस से काफी मिलती-जुलती है। कुछ शराब उत्पादों के कार्टन पर सेब और आम जैसे फलों के चित्र बने होते हैं और उन्हें फ्लेवर्ड ड्रिंक्स के रूप में प्रचारित किया जाता है, जबकि उनके भीतर वोदका जैसी तेज शराब होती है। इस वजह से आम नागरिकों और बच्चों के लिए सामान्य जूस और शराब के पैकेट में अंतर करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इन पैकेटों पर तंबाकू उत्पादों की तरह कोई प्रमुख वैधानिक चेतावनी भी नहीं लिखी होती है।
याचिका में दलील दी गई है कि टैट्रा पैक और पाउच के कारण शराब को छिपाना आसान हो जाता है, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, कम उम्र के बच्चों तक इसकी पहुंच बहुत आसान हो गई है और एक राज्य से दूसरे राज्य में शराब की तस्करी का खतरा भी बढ़ गया है। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस तरह की पैकेजिंग पर रोक लगाने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति तैयार करे और शराब की केवल कांच की बोतलों या स्पष्ट रूप से पहचानी जाने वाली बोतलों में ही बिक्री सुनिश्चित करे।
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