गोरखपुर , अगस्त 20 -- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पाद टेराकोटा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ इससे जुड़े कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से गुरुवार को विकास भवन सभागार में एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी दीपक मीणा ने की। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी समेत ओडीओपी योजना से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में टेराकोटा उद्योग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के साथ कारीगरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, उत्पादन बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने और बड़े बाजार से जोड़ने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि गोरखपुर का टेराकोटा केवल स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला उत्पाद नहीं, बल्कि जिले की पारंपरिक कला और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप विकसित कर कारीगरों के लिए बेहतर आय और रोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से ठोस कार्ययोजना बनाकर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ओडीओपी योजना का लाभ पात्र कारीगरों और उद्यमियों तक समय से पहुंचे तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
बैठक में टेराकोटा कारीगरों की संख्या, उनके उत्पादन, प्रशिक्षण, बाजार की उपलब्धता, ऋण सुविधा, तकनीकी सहायता और उत्पादों की बिक्री से संबंधित बिंदुओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों से जानकारी ली गई कि वर्तमान में कितने कारीगर ओडीओपी योजना से जुड़े हैं और कितने कारीगरों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पात्र कारीगरों को चिन्हित कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें पूंजी, तकनीक और बाजार की समस्या का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी ने टेराकोटा उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में सुधार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के बाजार में केवल पारंपरिक उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग के अनुरूप नए डिजाइन और उपयोगी उत्पाद तैयार करना भी जरूरी है। पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर टेराकोटा के ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं, जिनकी मांग देश के बड़े शहरों के साथ ऑनलाइन बाजार में भी बढ़ाई जा सके।
बैठक में टेराकोटा उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग तैयार कराने के साथ उनकी विशिष्ट पहचान को सामने लाया जाए। उत्पादों पर गोरखपुर की टेराकोटा कला की विशेषताओं को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए, जिससे दूसरे क्षेत्रों के ग्राहकों को भी इसकी पहचान और विशेषता के बारे में जानकारी मिल सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि कारीगरों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उन्हें बाजार और ग्राहक से सीधे जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाए। इसके लिए स्थानीय बाजारों के अलावा मेलों, प्रदर्शनियों, सरकारी आयोजनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर टेराकोटा उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और कारीगरों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
बैठक में टेराकोटा कारीगरों को प्रशिक्षण देने के विषय पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि समय-समय पर कारीगरों को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि प्रशिक्षण के बाद उसका वास्तविक लाभ कारीगरों के उत्पादन और आय में दिखाई देना चाहिए।
मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने भी संबंधित अधिकारियों से कहा कि ओडीओपी योजना के तहत चल रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय से कारीगरों को प्रशिक्षण, ऋण, तकनीकी सहायता और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को पात्र लाभार्थियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने के निर्देश दिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित