पटना , अप्रैल 09 -- टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से गुरूवार को "डीएनए आइसोलेशन एवं एगारोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को आधुनिक आणविक जीवविज्ञान की महत्वपूर्ण तकनीकों से अवगत कराना तथा उन्हें प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान करना था। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि आज के युग में आणविक जीवविज्ञान की तकनीकें वैज्ञानिक अनुसंधान की रीढ़ बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि डीएनए आइसोलेशन एवं इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसी तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक रूप से सशक्त बनाता है, बल्कि उन्हें भविष्य के शोध एवं जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी भी बनाता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार एवं अनुसंधान की भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में डीएनए आइसोलेशन की मूल अवधारणाओं, डीएनए निष्कर्षण की विधियों, एगारोज जेल की तैयारी, सैंपल लोडिंग, इलेक्ट्रोफोरेसिस की प्रक्रिया, डीएनए बैंड्स के अवलोकन एवं परिणामों की व्याख्या पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, इन तकनीकों के जैव प्रौद्योगिकी एवं शोध में उपयोगों पर भी चर्चा की गई।
वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विनय भूषण कुमार ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करने में अत्यंत सहायक होती हैं और उन्हें शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
कार्यशाला में वनस्पति विज्ञान के छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. रवि प्रभाकर, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ हंस कुमार सिंह, डॉ. रामानुज, दीपक कुमार, अरविंद कुमार सहित अन्य शोध छात्र भी उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित