बहराइच , अगस्त 06 -- उत्तर प्रदेश के बहराइच में विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने माताओं से अपील की है कि टीबी, फाइलेरिया अथवा अन्य सामान्य बीमारियों के दौरान बिना चिकित्सकीय सलाह के स्तनपान बंद न करें। विभाग का कहना है कि अधिकांश सामान्य बीमारियों में डॉक्टर की निगरानी और उचित उपचार के साथ स्तनपान पूरी तरह सुरक्षित रहता है तथा यह नवजात के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषण है। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में देवीपाटन मंडल में 3.18 लाख से अधिक नवजात शिशुओं को जन्म के पहले घंटे के भीतर मां का दूध पिलाया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल से घर लौटने के बाद बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों और परिवार के संकोच के कारण कई माताएं स्तनपान जारी रखने को लेकर असमंजस में पड़ जाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि डॉक्टरों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के सतत मार्गदर्शन से अनेक माताओं ने इन भ्रांतियों को दूर कर अपने शिशुओं को पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाया तथा कई माताओं ने दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखा। उनका कहना है कि इससे उनके बच्चे स्वस्थ हैं, बेहतर तरीके से बढ़ रहे हैं और अपेक्षाकृत कम बीमार पड़ते हैं।
जरवल ब्लॉक के रिठौढ़ा गांव की रिंकी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें फाइलेरिया हो गया था। परिवार को आशंका थी कि स्तनपान से बच्चे को भी संक्रमण हो सकता है, लेकिन आशा कार्यकर्ता ने समझाया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलता है, मां के दूध से नहीं। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को दो वर्ष तक स्तनपान कराया। आज उनका छह वर्षीय बेटा पूरी तरह स्वस्थ है और विद्यालय जाता है।
बलरामपुर जिले के श्रीदत्तगंज निवासी मीना देवी ने 1635 ग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। कम वजन के कारण नवजात को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती किया गया। बच्ची स्तनपान नहीं कर पा रही थी, इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों ने मां का दूध निकालकर कटोरी-चम्मच से पिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से विकसित हो रही है।
वहीं श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र की एक 26 वर्षीय महिला को प्रसव के बाद टीबी का पता चला। चिकित्सकों ने नियमित उपचार, शुरुआती दिनों में मास्क के उपयोग और पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह दी। महिला ने चिकित्सकीय परामर्श का पालन किया और अपने शिशु को स्तनपान कराना नहीं छोड़ा। अब उनका डेढ़ वर्षीय बेटा स्वस्थ है और महिला भी टीबी से पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि अधिकांश सामान्य बीमारियों और उनकी दवाओं के दौरान भी स्तनपान सुरक्षित रहता है। इसलिए किसी भी भ्रम में आकर स्वयं दवा बंद करने या स्तनपान रोकने के बजाय चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे उचित कदम है। विभाग ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है, जो उसे संक्रमण से बचाने के साथ-साथ स्वस्थ विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित