प्रयागराज , जून 22 -- उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा टीजीटी और पीजीटी भर्ती नियमावली में किए गए संशोधनों के विरोध में बेरोजगार युवाओं का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। नई भर्ती नियमावली को वापस लेकर पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। सिविल लाइंस स्थित पत्थर गिरजाघर धरना स्थल पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने आयोग से 23,775 पदों के प्राप्त अधियाचन पर पुरानी नियमावली के आधार पर शीघ्र विज्ञापन जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नई नियमावली के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 1992 की नियमावली के तहत अब तक टीजीटी और पीजीटी की भर्तियां होती रही हैं, लेकिन आयोग ने बिना किसी पूर्व सूचना या परामर्श के भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में लागू की गई नई नियमावली के कारण प्रदेश के पांच लाख से अधिक बेरोजगार युवा प्रभावित हो सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में बीएड को अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि अभ्यर्थियों की मांग है कि इस अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।

प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि नई नियमावली से प्राविधिक कला, हिंदी, अंग्रेजी, शारीरिक शिक्षा और संगीत विषयों के अभ्यर्थी विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा गृह विज्ञान विषय से संबंधित अभ्यर्थियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आयोग पर कंप्यूटर शिक्षकों की अलग से भर्ती प्रक्रिया शुरू न करने का भी आरोप लगाया।

धरनारत अभ्यर्थियों ने मांग की कि आयोग पुरानी नियमावली बहाल करते हुए जल्द भर्ती विज्ञापन जारी करे, ताकि कोई भी पात्र अभ्यर्थी अवसर से वंचित न रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं और पुरानी नियमावली के आधार पर विज्ञापन जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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