दरभंगा , अगस्त 01 -- बिहार में टीआरइ-4 शिक्षक भर्ती की विषयवार रिक्तियों में मैथिली भाषा एवं साहित्य को शामिल नहीं किए जाने पर मिथिला मैथिली के विकास के लिए समर्पित विद्यापति सेवा संस्थान ने गहरी नाराजगी जताई है। शनिवार को ई-मेल एवं पंजीकृत डाक से बिहार के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को भेजे आपत्ति पत्र में संस्थान की ओर से कहा गया है कि शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रकाशित विज्ञापन में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली भाषा की एक बार फिर से अनदेखी किए जाने से आठ करोड़ मैथिली भाषी काफी आहत हुए हैं और वे इसे अपनी मातृभाषा का अपमान मानते हैं।

विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि यह अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सूबे की सरकार संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल प्रदेश की इकलौती भाषा मैथिली के बेरोजगार युवाओं को बार-बार ठगने का काम कर रही है, यह सर्वथा अनुचित है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि विगत वर्ष भी शिक्षकों की नियुक्ति में मैथिली भाषी प्रतिभागियों की अनदेखी की थी। इसके लिए स्थानीय सांसद सहित विभिन्न संगठनों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री से इस भूल सुधार के लिए गुजारिश की थी और काफी प्रयास के बाद घोषित रिक्तियों में इसे शामिल किया गया था,लेकिन इस बार फिर प्रकाशित विज्ञापन में मैथिली को शामिल नहीं किया जाना किसी सोची समझी साजिश का हिस्सा मालूम पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस कृत्य से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि मैथिली के प्रति सरकारी स्तर पर गंभीर षड्यंत्र चल रहा है। मिथिला एवं मैथिली के विकास के नाम पर ओछी राजनीति की जा रही है। जैसे मिथिला और मैथिली के प्रति सरकार की नजर में कोई कद्र ही नहीं हो। सरकार यदि समय रहते भूल सुधार नहीं करती है, तो इसके लिए तीव्र आंदोलन का रूख अख्तियार किया जाएगा।

मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल बिहार की एकमात्र भाषा मैथिली के साथ ऐसा कर उसकी प्रगति में सोची-समझी राजनीति के तहत बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। इसे राज-काज की भाषा बनाये जाने में कोताही बरतने के साथ ही मैथिली के शिक्षकों की बहाली में बार-बार नियम-कानूनों की अवहेलना कर मिथिलावासी एवं मैथिली भाषी प्रतिभा का घोर अपमान किया जा रहा है।

वहीं, संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. बुचरू पासवान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मैथिली भाषा के समग्र विकास में यदि कोई रोड़ा डालेगा तो मिथिलावासी चैन से नहीं बैठेंगे।

संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने टीआरई-4 के विज्ञापन में मैथिली की रिक्तियों को शामिल नहीं किए जाने को मिथिला की भाषा, संस्कृति और करोड़ों मैथिली भाषियों के सम्मान की उपेक्षा बताते हुए सरकार से तत्काल मैथिली विषय का पद सृजित कर भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है।

संस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नारायण राम ने कहा कि माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से छात्रों की पढ़ाई लंबे समय से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार टीआरइ-4 के विज्ञापन में संशोधन कर मैथिली विषय का पद यथाशीघ्र सृजित नहीं करती है, तो विद्यापति सेवा संस्थान अन्य मैथिली सेवी संस्थानों को एक प्लेटफार्म पर लाकर मिथिला क्षेत्र में चरणबद्ध आंदोलन चलाने को मजबूर होगी।

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