नयी दिल्ली , अप्रैल 21 -- निजी क्षेत्र की इस्पात कंपनी टाटा स्टील अपने जमशेदपुर संयंत्र में इलेक्ट्रिकली-एसिस्टेड सिनगैस स्मेलटर (ईसीमेल्ट) प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेगी जिससे कार्बन उत्सर्जन में 50 प्रतिशत की कटौती संभव होगी।
साल 2045 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखने वाली टाटा स्टील ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उसने इस प्रौद्योगिकी के लिए एसएमएस समूह की कंपनी पॉल वुर्थ के साथ अंतिम समझौता किया है। दुनिया में पहली बार इस तकनीक का औद्योगिक स्तर पर कार्यान्वयन होगा।
टाटा समूह की कंपनी ने बताया है कि वह झारखंड के जमशेदपुर स्थित अपने संयंत्र में 'ई' ब्लास्ट फर्नेस (649 वर्ग मीटर) में चरणबद्ध तरीके से इस प्रौद्योगिकी को अपनायेगी। उसने कहा है कि इस परियोजना का लक्ष्य ब्लास्ट फर्नेस के मौजूदा संचालन की तुलना में कार्बन डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन को 50 प्रतिशत से अधिक कम करना है।
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